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Thursday, 22 December 2016

मुझे मालूम नहीं
ये मैं क्या कर रहा हूँ
ज़िन्दगी बनाने में ही
ज़िंदगी कम कर रहा हूँ
हर किसी से सुना है हमनें
कुछ बन जा फिर मौज़ करना
वक़्त का तकाज़ा नापने चला हूँ
घटते हुए दिन में
सोचता हूँ मैं जी रहा हूँ
या यूँ ही  वक़्त काट रहा हूँ
जैसे कोई सज़ा दी गई हो उनकी महफ़िल में
मुझे मालूम नहीं........

कहे अग़र

कहे अगर तो,
कह दो की दिन नहीं
अब रात है
एक ही दीवार के आश्रय में
होती ख़ामोशी में अब बात है
वो ज़माना गुज़र गया
जब मुस्कुराने को समझते थे, साथ है
अब तो नज़रें भी मिलाना ज़ुर्म है
गलती से भी गलती न कीजियेगा
वर्ना कब सुनने को मिल जाय
तुम्हारी क्या औक़ात है
ये ग़लत भी नहीं है मग़र
सही का भी कहाँ साथ है
जितनी टेंशन chemistry,physics,और डेबिट क्रेडिट नही देती
उतना तो फ्रेंड zone का हाथ है
कहे अगर
तो कह दो .....😉😉

Wednesday, 7 December 2016

ख़ालिस है या ख़ता है

ख़ालिस है या ख़ता है
गुमनामी में हूँ या नशा है
तू कुछ कहता क्यूँ नहीं
इस मर्ज़ी की वज़ह क्या है

ख़ामोश दर्द की इंतहा क्या है
टुकड़ो में ज़िन्दगी की वज़ह क्या है
कहते है लोग ,वक़्त पे सब कुछ मिल जाता है
तो रहबेरों में चुन्ने की वज़ह क्या है

या तो तू है जो ये सब चलाता है
सृस्टि या हमारे जैसे को घुमाता है
साफ़ साफ़ क्यों नहीं कहता कसुर क्या है
आख़िर क्यूँ मुझें  इतना भटकाता है

कहते है तेरे घर में देर है अँधेर नहीं
मगर मैं पूछता हूँ वो वक़्त कहाँ है अब तक
जिसके इंतज़ार में रंजनी हो चला है ये नयन
अगर देना ही तो इतना क्यूँ सताता है
ख़ालिस है या ख़ता है ........
            -Binodanderson
             7/12/16(23:30)
             M nagar

खाली हाथ चले थे लेकर उम्मीद मंज़िल की ऒर
क्या पता मंज़िल से पहले  मंज़िल मिलेगी भी या नहीं

Sunday, 4 December 2016

ये मौसम कैसा
खिंचा खिंचा -सा है
तेरे बिना न जाने क्यों
हर पल मेरा सुना सुना सा है

Saturday, 26 November 2016

हर बार गलतियां
मैं क्यूँ करता हूँ
मैं ही क्यूँ तुझे
खोने से डरता हूँ
हर बार

अपनी गलतियां मैं
फिर भी मन लेता हूँ
सही ग़लत के फ़र्क में
रिश्ता टूटने से डरता हूँ
हर बार

मर्ज़ हर बार मैं सहता हूँ
ख़ामोश रहके भी मुसुकुरता हूँ
जिस दिन चला जाऊंगा छोड़ के
साहिल पे दम तोड़ दोगी जनता हूँ

             2:22AM (27/11/16)

भूख-सी ज़िन्दगी है
भूख सा ही  अपना जहां है
जीता दिया जिनकों उम्मीदों पे
करता नहीं कुछ अपनों सा है
चंद लोगोँ को देख कर
लगा दिया मौत को कतार सा है

अब मैंने फ़ैसला कर लिया
तेरे बग़ैर बहुत जीय लिया
और मर लिया
ख़ामोश ख़्यालो में भी तड़प लिया

Wednesday, 23 November 2016

जहाँ से चले थे
आज हम
वही मिले
सोचता हूँ
चले थे या रुके हुये हम मिले

मेरे अक्स का आईना
कोई और है
ख़्वाब में भी
होता होता कोई और है

Tuesday, 15 November 2016

Banks bal

तो आइए जानते हैं कि आप किस तरह अपने बैंक का बैलेंस चेक कर सकते हैं वो भी बिना इन्टरनेट के बड़े ही आसानी से USSD Codes (Numbers) के माध्यम से-
डायल करें ये नंबर
* 99* 41# - State Bank of India
* 99* 42# - Punjab National Bank
* 99* 43# - HDFC Bank
* 99* 44# - ICICI Bank
* 99* 45# - AXIS Bank
* 99* 46# - Canara Bank
* 99* 47# - Bank Of India
* 99* 48# - Bank of Baroda
* 99* 49# - IDBI Bank
* 99* 50# - Union Bank of India
* 99* 51# - Central Bank of India
* 99* 52# - India Overseas Bank
* 99* 53# - Oriental Bank of Commerce
* 99* 54# - Allahabad Bank
* 99* 55# - Syndicate Bank
* 99* 56# - UCO Bank
* 99* 57# - Corporation Bank
* 99* 58# - Indian Bank
* 99* 59# - Andhra Bank
* 99* 60# - State Bank Of Hyderabad
* 99* 61# - Bank of Maharashtra
* 99* 62# - State Bank of Patiala
* 99* 63# - United Bank of India
* 99* 64# - Vijaya Bank
* 99* 65# - Dena Bank
* 99* 66# - Yes Bank
* 99* 67# - State Bank of Travancore
* 99* 68# - Kotak Mahindra Bank
* 99* 69# - IndusInd Bank
* 99* 70# - State Bank of Bikaner and Jaipur
* 99* 71# - Punjab and Sind Bank
* 99* 72# - Federal Bank
* 99* 73# - State Bank of Mysore
* 99* 74# - Sout vch Indian Bank
* 99* 75# - Karur Vysya Bank
* 99* 76# - Karnataka Bank
* 99* 77# - Tamilnad Mercantile Bank
* 99* 78# - DCB Bank
* 99* 79# - Ratnakar Bank
* 99* 80# - Nainital Bank
* 99* 81# - Janata Sahakari Bank
* 99* 82# - Mehsana Urban Co-Operative Bank
* 99* 83# - NKGSB Bank
* 99* 84# - Saraswat Bank
* 99* 85# - Apna Sahakari Bank
* 99* 86# - Bhartiya Mahila Bank
* 99* 87# - Abhyudaya Co-Operative Bank
* 99* 88# - Punjab & Maharashtra Co-operative Bank
* 99* 89# - Hasti Co-Operative Bank
* 99* 90# - Gujarat State Co-Operative Bank
* 99* 91# - Kalupur Commercial Co-Operative Bank.

Wednesday, 9 November 2016

ख़ामोश हूँ मैं रहता
कभी किसी से न अपना दर्द बयां करता
कभी  न कभी  समझोगे आप
बस यही उम्मीद हूँ मैं रखता
ख़ामोश.........
           भारतीय सेना

Friday, 4 November 2016

इस ज़िंदगी के धुप छाँव में

कितना कुछ बदल गया है
इस ज़िन्दगी के धुप छाँव में
ख़ामोश बेजुबां-सा
जो घर के किसी कोने में खड़ा था
अपने कोमल नन्हे पांव में
गाँव छोड़ बाहर निकलकर
जब पैर पसारा शहर के अरांव में
उससे क्या मालूम था बदल जायेगा सब कुछ
बस पल भर के ठहराव में
फिर कोशिश करके थोड़ा बदला
लोगो ने कह दिया (बदल गया तेरा लौंडा) ताव में
अब कैसे उनको समझाऊँ
नहीं ढीठ सा रह सकता
पछिया तूफान के पड़ाव में
समय के साथ अगर न बदला
तो मिल जाऊंगा किसी गटर के टांव में
फिर भी लोग समझ न पाते
घर जाने से (ढेरों मिलता ) जीने के सुझाव में
कैसे उनको कोई कहे
गुज़र गया वो ज़माना, जहां नौकरी होती थी पांव में
अब तरफ़ शैलाब खड़ा है
चाहे जन्म हो या मरण या शमशान के जलाव में
कितना कुछ बदल गया है
इस ज़िन्दगी के धुप छावँ में।
            -Binodanderson
             M.nagar (4/11/16)22:44

Wednesday, 2 November 2016

कितना आसान हो गया है

कितना आसान हो गया है
हर किसी के लिए
औरों का अपमान करना
ख़ुद की नहीं दूसरें के गिरेबान में
झांक के देखना
कितना .........

किसी के वज़ूद को तय करना
अपनी गन्दी संक्रीन सोच में शामिल करना
रंग रूप भेष भाषा से
किसी के मन की तहज़ीब मापना
कितना ............

सूरत ही अब सब कुछ है
सीरत को गन्दी ओक्ष से देखना
हर किसी को अपनी नज़रो से
जज से करना ,अपनी वल्गर शब्दों से
ख़ुद को प्रकांड समझना
कितना आसान हो गया है
      -Binodanderson
       M nagar

Wednesday, 26 October 2016

ग़रीबी क्या है

ग़रीबी क्या है
भूख है
बुरा स्वपन है
डर है रोग है
विवस्ता का सर लिए
प्रकोप है
पंचर की दुकान पे बैठा
किताब,स्कुल को देख
बस महसूस करना
इक दिन अमीर बनुगा
ये कठोर उम्मीद है
अघर के आँगन में
बारिश में भींगने का एहसास है
हर किसी के डांट चले जाने पे
खामोश घुटन जज़्बात है
शीशे के अंदर झांक
खाने को महसूस करने की प्यास है
बीमार हूँ पर फ़ीस नहीं
मज़बूरी का लाश है
बेरोजगारी और लाचारी है
आने वाले कल का डर है
खाने की तलाश में
बस खुद को ज़िंदा रखने की इक्षा है
कई तो कैलोरी में मापते है
मज़बूरी ,ज़ज़्बात एहसास क्या
ग़रीबी एक समय है
हास्य है ,अभिश्राप है
           -Binodanderson
            26/10/16 (22:56)
            M.Nagar

Thursday, 20 October 2016

धुप बदला है

धुप बदला है
छांव बदला है
बाहर आके देखो
जिंदग़ी का स्वरूप बदला है

मौसम की नमी में भी दर्द होता है
महसूस करने वालों का मिज़ाज़ बदला है
पहले पिट दो हम देख लेंगें
बस कहने वालों का स्टेज बदला है

मिट गई है इंसानियत
बस इंसान का रूप बदला है
मर रहे हो तो मरो , हमारा क्या
अब तो सबों का तहज़ीब बदला है

झूठी शानों-शौक़त में लिप्त है इंसान
माँ - बाप को देखने का क़िरदार बदला है
रात हो या दिन परवाह नहीं पालने में जिनको
आज उन्हीं के लिए घर बार बदला है

धर्म के नाम पे लाखों खर्च करते है
ग़रीबो को देख इंसानियत न पिघला है
पब हो या बार उड़ाते दिलखोल के यार
मग़र ठण्ड रात में खड़ा बेचारा पे ज़ुबां का इस्तेमाल बदला है

अंदर फ़र्क़ नहीं 30ml की
बहार ₹10में संसार बदला है
देख लो समाज का आईना, कमज़ोर की जात नहीं देखते
बस शासन का झंकार बदला है

कोई फ़र्क नहीं अगर तुम अमीर हो
मंदिर हो या मस्जिद सबका ईमान बदला है
ग़रीब का क्या ,वो तो खाते सोते परेशान
उनका तो बस मेज़बान बदला है

मरने से पहले कितना हाय तौबा करते
श्मशान में मेहमान बदला है
हर चीज़ है उनकी बनाई
लेकिन आज भी समाज में रहने का उनका स्थान बदला है
धूप बदला है
छांव बदला है

    -Binodanderson
     01:19AM (20/10/16)

Thursday, 13 October 2016

वक़्त का पहचान हो रहा है

वक़्त का पहचान हो रहा है
तुलसी का क्या सम्मान हो रहा है
इंसान की अब कद्र कहाँ
कुत्तों का सम्मान हो रहा है
वक़्त का.........

पूजते थे घर में जिनको
घर के बाहर रख क्या अभीमान बढ़ रहा है
पाला-पोषा  जिनको प्यार से
उन्हीं से कहाँ सम्मान मिल रहा है
        -Binodanderson
         22/04/16 (22:35 )
         M.Nagar

वक़्त का पहचान हो रहा है

वक़्त का पहचान हो रहा है
तुलसी का क्या सम्मान हो रहा है
इंसान की अब कद्र कहाँ
कुत्तों का सम्मान हो रहा है
वक़्त का.........

पूजते थे घर में जिनको
घर के बाहर रख क्या अभीमान बढ़ रहा है
पाला-पोषा  जिनको प्यार से
उन्हीं से कहाँ सम्मान मिल रहा है
        -Binodanderson
         22/04/16 (22:35 )
         M.Nagar

Tuesday, 11 October 2016

हर दर्द की तासिर है मुझमें
गुज़रे जमाना का फ़क़ीर है मुझमे
बनाने वाले ने न जाने क्या सोच कर बनाया
हर बदनसीब का तस्वीर है मुझमें

Monday, 10 October 2016

तेरे पैरों की

तेरे पैरों की आहट
कहाँ से आ रही है
जबकि न तुम जा रही हो
न आ रही हो

ख़ामोश है तन मेरा
फिर भी तेरी खुशबु से मदहोश हो रहा हूँ
जबकि न तेरी शिनाख़्त है कही
न तुम आ रही हो

बेपीर ज़िस्म धड़क रहा है
आज भी तेरे साँसों से
जबकि न तुम दूर हो रही हो
न पास आ रही हो

न जाने कितनी मोहब्बत हो गई है
मेरे इस ताब्सिर आफताब को
न अँधेरा छट रहा है
न तुम मुस्तकबीर हो रही हो

तेरा अक्स है मुझमे या
मैं ही खो गया हूँ
आज भी इन निग़ाहों को इंतज़ार है तेरा
इनायतों का रहम है कि तुम आ रही हो
तेरे पैरों .......
     -Binodanderson
      09/10/16(1:05AM) M. nagar

Saturday, 8 October 2016

मुझें अब किसी पे ऐतबार न रहा
हद से ज़्यादा किसी से प्यार न रहा
शांत हो गई है ये दरियां ये दीवारें दो ख़त
अब समय का क्या करे मुझे तो किसी का इंतज़ार न रहा

ये कसमे वादे सब झूठे लगते है
इस जिंदगी का क्या करे जिसका कोई सार न रहा
बहुत टूट कर चाहा था मैं भी किसी को
अपनी तो जिंदगी मौत से भी बतर है
अँधेरे में अंधकार न रहा
मुझे
            
ख़ुदा भी न दरियादिली दिखाई
अब तो ख़ुद से भी प्यार न रहा
दूसरे मुझसे क्या उम्मीद करे
मुझे तो अपनों का भी ऐतबार न रहा
मुझे
       - Binodanderson
               29/09/16(11:10AM)
               Traveling to delhi(near to Aligarh )

The relationship which never ended

The day was so clear n crystal like the things happen just few minutes ago. It was chakravarti hindi class in
Purnea navodaya in 2005. I was talking to my best friend Raj .and then something happen .jitesh who was know as bad guys of school even senior girls didn't want to talk .he is healthy smart but lil poor in class resist a girl name is parmeet kaur . As we know in every school every class having jitesh type guys .that make us laugh n pass dirty jokes on everyone. But that day happen something different, my eyes couldn't believe on that .she not just slap but did everything to him. she (means parmeet ) is fabulous spotless having natural beauty ,her eyes like she wanted to say you something like you are diving in it .her face expression like you wanna kiss her as soon as possible. Her hair as long as her kurti.i know you guys what wanna say .but this true . that thing is not as you understand .after that I don't know what happens with me ,most of the time my eyes catch her. and
Finally I courage my heart and i proposed for friendship but she said I don't wanna be friendship with any boys but you could be my brother .I said NO , not that mean I wanted to she became my girlfriend .only Friend.

Saturday, 24 September 2016

मेरा देश बदल रहा है

वर्षो बाद सुना है
अपना नाम चल रहा है
कागज़ के नीव की जगह
Digital बोर्ड लग रहा है
मेरा देश बदल.....

रोटी से अभी भूख भी न ख़त्म हुई
Data का चस्का लग रहा है
जहाँ हाथों में हल कुल्हार थे
वहाँ रेडियो से मन की बात सुन रहा है
मेरा देश बदल .......

एजुकेशन फ़ी हो या हो ट्रेवल का भार
सब का rate बढ़ रहा है
मन की बात हो या योजनाओं पे तमाच
हर जगह अपना नाम गढ़ रहा है
आज फिर से भारत इंडिया बन रहा है
मेरा देश बदल ......

जहाँ देखो होड़ मची है
ग़रीबी की आंच में झोंक के जीडीपी बढ़ रहा है
किसान हो या विद्यार्थी
दोनों जिंदगी से लड़ रहा है
मेरा देश बदल ......

बहुत उम्मीदों से जिताया था
अब वो उम्मीद ख़त्म हो रहा है
अपने वानर सेना में
ख़ुद ही फ़िसल रहा है
मेरा देश बदल रहा है

वादे किए हज़ार, चाहे पुरे न हुए एक भी यार
इन्फ्लेशन था 14 के पार अब है 4 के आर
दाल हो या सब्जी सबका रखा है ख़्याल
आख़िर आप सब ने ही बनाई है अपनी सरकार
             -Binodanderson
              Some where in train on way                                            To patna 16:41(23/09/16)

Monday, 19 September 2016

मेरी ज़िन्दगी न मेरा है

मेरी ज़िन्दगी न मेरा है
ख़ुदा भी मुझसे कहाँ जुड़ा है
थोड़े थोड़े ख़ुशी में भी
उनको जाने क्या गड़ा है
मेरी ज़िन्दगी....

हर वक़्त रहता इंतज़ार है
कब मिलेगी वो ख़ुशी जो ज़ार ज़ार है
इस उम्मीद में अब भी सब के विश्वास
को कर रहा तार तार है
मेरी ज़िन्दगी........

अब तू ही बता मेरा कौन है सिवा तेरे 
फिर भी उजड़ा मेरा संसार है
मौला अब तो छोड़ दे, मेरी हिज़्र से यूँ खेलना
सवाँर दे मेरी क़िस्मत जो अब तक बेकार है
मेरी ज़िन्दगी .....

          -Binodanderson
           21:18 (19/09/16)
           INS Metro

मेरी ज़िन्दगी न मेरा है

मेरी ज़िन्दगी न मेरा है
ख़ुदा भी मुझसे कहाँ जुड़ा है
थोड़े थोड़े ख़ुशी में भी
उनको जाने क्या गड़ा है
मेरी ज़िन्दगी....

हर वक़्त रहता इंतज़ार है
कब मिलेगी वो ख़ुशी जो ज़ार ज़ार है
इस उम्मीद में अब भी सब के विश्वास
को कर रहा तार तार है
मेरी ज़िन्दगी........

अब तू ही बता मेरा कौन है सिवा तेरे 
फिर भी उजड़ा मेरा संसार है
मौला अब तो छोड़ दे, मेरी हिज़्र से यूँ खेलना
सवाँर दे मेरी क़िस्मत जो अब तक बेकार है
मेरी ज़िन्दगी .....

          -Binodanderson
           21:18 (19/09/16)
           INS Metro

Saturday, 17 September 2016

वर्षो मुलाक़ात के बाद

वर्षो मुलाक़ात के बाद
फिर हो गई है दुरी की शुरुआत
न जाने कब किस मोड़ पे
फिर अपनी होगी पुरानी सी मुलाक़ात
वर्षो .........

दोस्ती है इतनी प्यारी
दुरी भी न बाँट पाते हमारे ज़ज़्बात
जब भी मिलता हूँ मनो वो सारे पल
होने लगते है आज भी telecast
वर्षो ...........

ख़ुदा भी अपने आप से होगा खफ़ा
देखकर अपनी गुल्फत भरी शामोसात
सोचता होगा क्या करूँ इन कमीनों का
कभी भी कही भी शुरू हो जाती है इनकी ज़मात
वर्षो..........

हर बार मिलके बिछुड़ने का गम
होता है बहुत तकलीफे हालात
मग़र उस ख़ुदा को कौन समझाये
दूरियों से नहीं बदलते हमारे जज़्बात
वर्षो ...........

हर बार सोचता हूँ एक ही जगह हो जाय सब
मगर बस में नहीं  अपने किस्मतों के हाथ
फिर कभी कही मिलके सब साथ करेंगे
वही पुराने दिनों की telecast
वर्षों...............
               -Binodanderson
                1:38 AM (17/09/16)
                 Laxmi nagar

Friday, 16 September 2016

ज़िंदगी के इल्म

ज़िन्दगी के इल्म न समझ सके
कोई फ़रियाद न थी
न कोई गिला सिकवा ख़ुदा से
फिर भी मज़बूरी का लात न समझ सके
ज़िंदगी का इल्म

हम अपनी मेहनत में मशगूल से थे
बस उनकी तबियत का मिज़ाज़ न समझ सके
तक्करर तो बहुत है उनसे फिर भी
शायद अपनी ही हालात को न समझ सके
ज़िंदगी के इल्म

आख़िर चाहता क्या है तू मुझे ये तो बता
रोने की इतलाह में आँखे न भींगा सके
कुछ भी सोचता ही हूँ ,ऐसा हालात हो जाता है
की लगता है अपनी औक़ात को न समझ सके
ज़िंदगी के इल्म

अब तो बस अब चूका हूँ झूठी ज़िंदगी जीने से
बांजड़े इश्क़ में एक कलियां न खिला सके
सोचता था क्या क्या करूँगा अपने जीवन में
मगर अपने समय के फिसलती रेत न पकड़ सके
जिंदग़ी के इल्म

Saturday, 10 September 2016

अधूरा रह जाता है

जितनी बार मिलता हूँ
ये प्यार ज्यादा हो जाता है
कितना भी जिद्द करू तो भी
पूरा होना अधूरा रह जाता है

कितना भी मिलु उनसे
प्यास प्यासा सा रह जाता है
कोशिश लाख कर ली मैंने
ख़ुद को पूरा महसूस करने की ,तेरे बग़ैर
ज़िन्दगी का हर सम्मा अधूरा सा रह जाता है

न जाने ऐसा क्या रिश्ता बना दिया भगवान ने
साँस तो लेता हूँ दड़कने अधूरा सा रह जाता है
तुझे एक बार देख लू मिल लू
मनो जिस्म में प्राण-सा आ जाता है

अकेले में भी आँखे, प्यार बयां कर जाती है
ख़ामोश रहता हूँ तेरी यादें मुझमे रंग भर जाता है
क्या करू तुझे पूरा पाने की
हर कोशिश करता हूँ फिर भी बिखरा सा रह जाता है
              -Binodanderson
               9/9/19(15:16)
               Laxmi nagar

Thursday, 8 September 2016

कैसे कहूँ
कैसी है तू
हर जहां में
सबसे प्यारी व् सुंदर है तू

Tuesday, 6 September 2016

तराज़ू पर जिंदगी रखा है
वरसात ने भी खिल खिला दिया
अब तक तो संभले भी न थे
कि दर्द भरी हवा ने भी तल्ख़ जगा दिया
तराज़ू पर

न जाने ख़ुदा ने क्या लिखा है मेरे नसीब में
एक पल मिलता नहीं, आँखों को भींगा दिया
न जाने कब वो दिन आएगा , जब सूखे होंटो को
जीने का नया मिशरा दिया
तराज़ू....

Monday, 5 September 2016

अधूरे ख्वाहिशों सा
मैं भी अधूरा हूँ
पूरी जिंदगी है
बस मैं ही नहीं पूरा हूँ

हर दिन कोशिश
करता मैं पूरा हूँ

Tuesday, 30 August 2016

न पास है न साथ है
मोहबत की ये कैसी बात है
इससे अच्छा तो वो वक़्त था
जो हर रोज़ तीन पहर की मुलाक़ात था
न पास है न ......

वक़्त बीत चुका है मग़र ये न कहना
वो तब की बात थी
सारा ज़माना आज भी जानता है
इस मुफ़्लसी के आलम में आज भी वो रौशन रात है
न पास है.........

मुझे आज भी याद है
तेरे पल भर के ओझल से दिल डर सा जाता था
ये दीग़र बात थी
आपको न मेरी इंतहा न मेरी मोहब्बत से मुलाक़ात थी
न पास है .........
          -Binodanderson
            23:39

Saturday, 27 August 2016

ये ख़ुदा

ये ख़ुदा
मुझे भी अब ठेहरा दे
थक चूका हूँ दर बदर से
अब अपना सेहरा दे
मेरी सुखी सरज़मीं को
अब एक नई कलम का मिशरा दे
ये ख़ुदा........

अब तक भीड़ में तन्हाई थी
अब पूरा मुक्कमल जहां दे
चुप चाप सहता रहा जो तूने दिया
अब मुझे मेरे हिस्से की ख़ुशियाँ दे
ये ख़ुदा...........

दर्द दिया मुज़सिर में भी न शहर किया
क़बूल मुझे हर मंज़र तेरा, अब रहमें कर्म दे
आधी ज़िंदगी गुज़र गई आपके आफ़रीन को
मेरे रजनी को इनायतों का शहर दे
ये ख़ुदा ............

थक चुका हूँ अब इन रहबेरों से
मुझे सड़क का पता नहीं, अब शहर दे
इस अंधकार के रौनक रौशनी में
अब उजालों का पहर दे
ये ख़ुदा......
        -binodanderson
         23:59 (27/08/16)

बुझ गया है दिया

बुझ गया है दिया
मगर आग अभी बाकी है
वर्षो पहले जो जलाया था चराग़ यूँ ही
उसके गर्मी का आफ़ताब अभी बाक़ी है
बुझ गया है .....

लोग कहते है दुरी सबकुछ मिटा देती है
फिर ये यादों का सिलसिला क्यों बाक़ी है
हर वक़्त हर किसी में अक्स उसका नज़र आता है
आज भी मेरे नज़रों का प्यास अभी बाक़ी है
बुझ गया है .........

दिल को कसीस आज भी है उनके चले जाने का
तन्हाई में बस एक झलक की चाह बाक़ी है
आ जाओ लौट के अगर जाना ही था तो आये क्यों
तेरे इंतज़ार में सासों का चलना अभी बाकी है
बुझ गया है.....
        -binodanderson
         18:34 (27/08/16) for Rajesh

Monday, 22 August 2016

आज भी कोशिश जारी है

आज भी कोशिश जारी है
अपने मोहब्बत पाने की
न जाने क्या ख़ुदा ने लिखा है
एक भी पल नहीं छोड़ता है आजमाने की
आज भी......

इतना तो अब मैं भी जान गया हूँ
उनको मंज़ूर नहीं मेरे अफ़साने की
पर उनको नहीं मालूम है
मुझे भी मंज़ूर नहीं उनसे दूर जाने की
आज भी .......

अपना सारा लम्हा अब उनके ही साथ गुजरूँगा
मुझे खौफ़ नहीं ज़माने की
मेरे हर बेमौसम में मेरे साथ थी
कैसे भूल सकता हूँ ऐसे परवाने की
आज भी ..........

जब भी कमी महसूस हुआ, वो साथ दिखी
कैसे ख़ुद को रोक सकता हूँ
ऐसी हमनसी पाने की
दर्द मिले या मौत
हर फ़क्त मुझे मुस्तकबीर है उनको पाने की
आज भी ............
            -Binodanderson
             23rd Aug16 (9:08AM)

Thursday, 18 August 2016

हर लम्हा गुज़र रहा

पल पल में
हर लम्हा गुज़र रहा
ख़ामोश रहूँ या लड़ता रहूँ
पर वक़्त का ये सेहरा पहर रहा
पल पल........

सोचता हूँ
ये मैं क्या कर रहा
कल की चाह में
आज क्यूँ बिखर रहा
पल पल ..........

सवाल मेरा नहीं ज़माने का है
ख़ुद को ऊपर जो कर रहा
तेरे हर काम से वो नाराज़ रहे
चाहे लाख कोशिश क्यूँ न कर रहा
पल पल ..........

जिंदगी आधी गुज़र गई
फिर भी मैं (दूसरी छोड़ पे)
ईंट आज भी रख रहा
मालूम मुझे भी है
हर ईंट पे ईंट कम हो रहा
पर क्या करूँ
ज़माने की सोहबत में ख़ुद को ज़िला रहा
पल पल ........
          -Binodanderson
            18/08 /16
             22:51

Monday, 15 August 2016

राख़ बाक़ी है

जल चुका हूँ मैं
लेकिन राख़ बाक़ी है
औरों की तरह ही
मुझमे आग बाक़ी है
चाहे रूप रंग या भेष भाषा
अलग हो
फिर भी अखण्डता में एकता
की चाह बाक़ी है
जल चूका हूँ मैं

माना ग़रीबी अशिक्षा व्याप्त है आज भी
फिर भी उनके दिलों में देशप्रेम बाक़ी है
जनता हूँ  नेताओं ने लूटा है देश
फिर भी डेमोक्रेसी में विश्वास बाक़ी है
जल चूका हूँ मैं

Sunday, 14 August 2016

आज़ादी खुदमदगारों का नहीं

आजादी खुदमदगारो का नहीं
नेता और चाटुकारो का नहीं
बलिदानी की सर चढ़ी जो
वो जातिवाद या धर्म के ठेकेदारों का नहीं
आजादी खुद.......

ये देश है गरीब किसानों का
किसी साहूकारों का नहीं
नेता और चाटुकारों को कह दो
ये देश किसी के
बाप के जमींदारों का नहीं
आजादी ख़ुदमद......

शासन और सेवा में फ़र्क होता है
कोई उनको याद दिलाओ,
ऐसी नीति सेवकारो का नहीं
बड़े बड़े तो हर कोई बोले
सच में सार्थक विचारों का नहीं
आजादी ख़ुदमद........

देना है तो दो आजादी
शिक्षा के कर्ज़ से
भूख से प्यास से
छुआ छुत के अपमान से
गरीबी के शार्प से
अमीरी के अभिमान से
बातों के क़िताब से नहीं
आज़ादी खुदमदगारो  का नहीं
          -Binodanderson
           3:50AM

बेशर्म हो इतने....

बेशर्म हो इतने की
शर्म भी शरमा जाए
हर बार मुँह की खाके
बेहया -सा फिर उग आए
बेशर्म हो.......

ख़ुद के घर में आग नहीं
पर दूसरों के चिंगारी जलाए
अपनी जनता मरती है
फिर भी गर्व से उनको(आतंकी) दामाद बनाए
बेशर्म हो .........

कैसे कर लेते हो ये सब
सारी दुनियां थूक रही फिर भी बाहर घूमें जाए
तुमसे तो लाख भले वो है कम से कम
खुश ख़बरी में ढ़ोल बजाने घर आए
बेशर्म हो ..........

ख़ुद को संवारने में अगर वक़्त दो
तो सारी उल्फ़ते ख़त्म हो जाए
मानवता का धर्म समझ के
सारी दुनिया दोस्त हो जाए
बेशर्म हो ............
              -Binodanderson
                In metro civil line
                8:40AM

Friday, 5 August 2016

न दवा का सिरस है
न ही ज़हर का
मोहब्बत में ये कैसा शहर है
न साहिल पे हूँ न ही मिले किनारा
न दवा का सिरस है

बार बार मिलता हूँ
फिर भी कम पड़ता है सारा
कुछ कहते है ये उम्र का दोष है
मैं कभी नहीं चाहता ये सच हो
क्योंकि आधी उम्र उनके संग ही है गुज़ारा
न दवा का सिरस है न ज़हर का

क़ुर्बान है मेरी हर सांस
पाने को आपका एहसास सारा
एक ही चीज़ मुद्दतों से पाया है
खो नहीं सकता उसको दुबारा
न दवा सिरस है न ज़हर

         -Binodanderson
           4th August 16
           16:04 training in metro from laxmi nagar to gtb nagar

Monday, 1 August 2016

क्या कहु
कैसा हो गया हूँ
खिल गया हूँ
या उदास हो गया हूँ
क्या कहू

इक ज़िंदगी है
अनन्त इक्षाये
एक पूरी हो रही है
तो दूसरी खाश हो गया हूँ
क्या कहु

मेरा कसूर है या किस्मत का
अपनी ज़िंदगी तो सुर्ख है मानो
मरुस्थल का प्यास हो गया हूँ
हर बार साफ नज़र आता है मंज़िल
पास आते आते हताश हो गया हूँ
क्या कहू

हजार प्रश्न है पूछने को
आख़िर कहाँ कमी है
जो दर के करीब आके छुट जाता है
कोशिशें नाक़ाम होती जा रही है
इस तरह हर गम का आफ़ताब हो गया हूँ
क्या कहु......
              -Binodanderson
                12:11AM ,2nd August 16

Saturday, 30 July 2016

दर्द को कब तक बेचता रहेगा

जिंदगी के दर्द को
कब तक बेचता रहेगा
मरहम  की आड़ में
सेंकता रहेगा
जिंदगी के दर्द....
उठ खड़ा हो ,सामना कर
दर्द और मर्ज़ की परवाह छोड़
कब तक किस्मत को कोसता रहेगा
वक़्त के साथ चल न आराम कर
मंजिल के पहले न विश्राम कर
मंझधार में कब तक टहलता रहेगा
ज़िन्दगी के दर्द......
एक साँस में पूरी न जी पायेगा
आधे पे रुका तो भी पचतायेगा
यूँ दुरी और गहराई को देख के न डर
अगर डरा तो क्या पूरी ज़िन्दगी जी पायेगा
ज़िन्दगी के दर्द को
कब तक बेचता रहेगा
              -Binodanderson
               21:18 (5th August 16)

Sunday, 24 July 2016

तस्वीर तल्ख़ जब पेपर में आई
कैसे बताऊँ क्या दर्द दिखाई
कल तक जो पूछता न था
कल तक जो जानता न था
आज बना है हमारी प्रजाई
तस्वीर

दूर से लोग अब पूछत है
कहो सुनाओ अब कैसी हो जाई
हम तो जानत है ये सब मज़िरा
कल बीत जाय फिर कौनो न पहचानाइ
तस्वीर

          24/7/16
           1:15 AM

Friday, 22 July 2016

तुम वो नहीं

तुम वो नहीं
जिसको जानते है
आज भी लोग
खुद को न पहचानते है
जमाना चाँद तक जा पहुँचा है
मगर आज भी इंसान इंसान को धुत्कारते है
तुम वो नहीं

ज़िंदगी गुज़र जाती है ख़ुद को बनाने में
आज भी ख़ुद को तामिल
औरों को कबाड़ मनाते है
देखो ज़रा इनका रुतबा
अपने दर्द पे मरहम, दूसरों पे नमक डालते है
तुम वो नहीं

बिना ज़ुबां की समझ नहीं तुझे
लेकिन अपने इंसानियत को तो जानता है
नहीं डरता हो अगर ख़ुदा से
मगर अपनी जन्म को तो मानता है
तुम वो नहीं
               -Binodanderson
                 21:37PM,20/07/2016