वर्षो मुलाक़ात के बाद
फिर हो गई है दुरी की शुरुआत
न जाने कब किस मोड़ पे
फिर अपनी होगी पुरानी सी मुलाक़ात
वर्षो .........
दोस्ती है इतनी प्यारी
दुरी भी न बाँट पाते हमारे ज़ज़्बात
जब भी मिलता हूँ मनो वो सारे पल
होने लगते है आज भी telecast
वर्षो ...........
ख़ुदा भी अपने आप से होगा खफ़ा
देखकर अपनी गुल्फत भरी शामोसात
सोचता होगा क्या करूँ इन कमीनों का
कभी भी कही भी शुरू हो जाती है इनकी ज़मात
वर्षो..........
हर बार मिलके बिछुड़ने का गम
होता है बहुत तकलीफे हालात
मग़र उस ख़ुदा को कौन समझाये
दूरियों से नहीं बदलते हमारे जज़्बात
वर्षो ...........
हर बार सोचता हूँ एक ही जगह हो जाय सब
मगर बस में नहीं अपने किस्मतों के हाथ
फिर कभी कही मिलके सब साथ करेंगे
वही पुराने दिनों की telecast
वर्षों...............
-Binodanderson
1:38 AM (17/09/16)
Laxmi nagar
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