कह दो की तुम
ग़लत नही है
मुफ़ीलीशि में जी लो
मग़र जिंदगी में कमी नही है
कह दो की .....
बुरा ही सही
कह दो कमी किसमे नही है
न जाने इतिहास का आँचल
क्या झेला है
न जाने कितने मासूम को
नर्क की आग में ठेला है
वो सुबह की इंतज़ार में
न जाने कितने जन्मों का बाकी मैला है
तुम आज फिर वही करने चले हो
जहाँ खून की नदियां दौड़ा हो
प्यार की जिगर नफ़रत फैला हो
कितनो की सुबह की शाम हुई
कितनो बेटी गुलाम हुई
कितनो की मांग श्मशान हुई
कितनो की ख़ाकी की शाम हुई
इन लाखों की खून से सलाम हुई
आज फिर वही हम करते है
तुम इंसानियत को भूल के
धर्म संस्कृति की बात करते हो
मुहब्बत जहाँ बस्ता था
सुबह तेरे घर की रोटी
शाम को मेरे घर रुख़सत सलाम हुई
आज दिलों में शाद नही
क्योंकि आपकी अपनी कोई आवाम नही
झुकते हो उनके आगे जो न कभी
आपके और हमारे काम हुई
नज़रों को इंसानियत से देखो
धर्म तो इनकी उपज़ बोटों की निशान हुई
याद करो तुम उनको भी (APJ)
जिनकी मंदिर से पहचान हुई
कोई धर्म कष्ट क्रोध नही सिखाता
प्यार ही सबका गुरु ज्ञान हुई
वक़्त रहते संभल जाओ
नहीं तो मुकमल अपनी मिट्टी भी खाम हुई
न जाने
-Binodanderson (1:58AM)
17/04/17
आज अखंडता की एकता
पे सवाल उठ रहे है
खाने खिलाने और मज़हब की छोड़ो
इश्क़ पे भी नकेल कस रहे है
संस्कृति और समाज के झूठे ठेकेदार
अपनी झूठी शान और प्रसार में
दूसरों पे अत्याचार कर रहे है
देखो ये दुनियां वालों होश में आओ
एक पहले ग़ुलाम थे अब ग़ुलामी की दीवार गढ़ रहे है
स्वतंत्रता तो अब भी क़िताबों में है
अब भी हम पास के करारों में रह रहे है
मत भूल आज हमारी बारी है कल आते देर नही
जब तुम भी हुक्मगारो के जुल्मों में तकरार कर रहे है
न शान है न शौक़त है
झूठी ज़िंदगी की यही फ़ितरत है
किसकी हैसियत से कूदते हो
ये सच्ची नहीं झूठी मोहब्बत है
न शान है न ......
न दूसरी जिंदगी है न बाकी दौलत है
सब यही रह जायेगा फिर क्यूं इतनी तोहमत है
झूठी इज़्जत आबरू में
फिर क्यूं करते सबको गुमरत है
न शान है न ..........
तू बस अपनी ज़िंदगी जी
दूसरे में जीने की क्यूं आदत है
जो करना है जैसे करना है खुलके कर
आना है यहाँ दुबारा मत सोच,एक बार जीने की जो सोहरत है
न शान है न . .........
हर कोई यहाँ तेरा सलाहकार बनेगा
ख़ुद कहानीकार बन कलम तुम्हारा मेहनत है
न घबरा न डर किसकी बात न मानने में
अपनी जिंदग़ी का तू ही घोतक है
न शान है न ............
-Binodanderson
6th April 17 (2:05AM)