न शान है न शौक़त है
झूठी ज़िंदगी की यही फ़ितरत है
किसकी हैसियत से कूदते हो
ये सच्ची नहीं झूठी मोहब्बत है
न शान है न ......
न दूसरी जिंदगी है न बाकी दौलत है
सब यही रह जायेगा फिर क्यूं इतनी तोहमत है
झूठी इज़्जत आबरू में
फिर क्यूं करते सबको गुमरत है
न शान है न ..........
तू बस अपनी ज़िंदगी जी
दूसरे में जीने की क्यूं आदत है
जो करना है जैसे करना है खुलके कर
आना है यहाँ दुबारा मत सोच,एक बार जीने की जो सोहरत है
न शान है न . .........
हर कोई यहाँ तेरा सलाहकार बनेगा
ख़ुद कहानीकार बन कलम तुम्हारा मेहनत है
न घबरा न डर किसकी बात न मानने में
अपनी जिंदग़ी का तू ही घोतक है
न शान है न ............
-Binodanderson
6th April 17 (2:05AM)
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