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Wednesday, 23 May 2012

वो कौन



WO कौन –सा है पहर
जो तेरी यादों का न होता हो कहर
हर-पल ये मुर्दा जगता है
तुझसे मिलने को तर्पता है
वो कौन ............................


हर अंश में खून –सा रमता है
मानों ,जिंदगी तुझमें बसता है
उठते ही बेचैन हो जाता हूँ
वो कौन ................................
दिल में एक अजीब कसीस है


आप को याद करने में भी एक रस है
तुम पास रहती हो तो भी
तुमसे मिलने की गजब कसीस है
वो कौन सा ..................... 
                        
                        PVR PLAZA
                                                           28TH FEB 11
                                                           2:34AM 

Sunday, 13 May 2012

छोट्टी-सी जिंदगी


छोट्टी-सी जिंदगी जिदगी में
चोट बहुत गहरा है
सबके बीच रह के भी
सर पे गम का सहरा  है
छोट्टी-सी जिंदगी ..................

चुप-चाप गम को पीती है
आँखों में जो डर जो पहरा है
लबों की हँसी को लपेट के
छोटी-सी  उम्र में जीती जिंदगी दोहरा है
छोट्टी-सी जिंदगी ..................

उम्र के तकज्जों में उलझ जाती है
ये समाज का तरीका है या बात गलत तहरा ठहरा है
कैसे मैं बताऊँ ये क्या है ,या जिनमें
माँ –बाप  व रिश्तेदारों का विश्वास जो गहरा है
छोट्टी-सी जिंदगी ..................

दर्द सहती है कुछ न कहती है
ख़ामोशी इनकी ,पापी को श्रय देती है
हर बार तार –तार होती है
ये शारीर पे नहीं दिल पे जख्म कुदेरा है
छोट्टी-सी जिंदगी ..................

जितनी बार कुदरे दर्द को भरने की कोशिश करती है
उतनी बार नया चोट उभरा है
बच्चों का विश्वास कामता है ,डर बढता है
दर्द की बारात दर पे जो ठहरा है
छोट्टी-सी जिंदगी ..................


( माँ –बाप का बच्चों का देखभाल करना धर्म है
  जन्म देना ही नहीं सिर्फ कर्म है
  कुरीतियों से बचाओ इनकी मासूमियत
  नहीं तो पैदा करना बहुत बड़ा अधर्म है )

                   08:30am
                                           14-05-12


तेरी याद


तेरी  याद हर तख़्त ताज को बेनूर कर देता है
मैं नहीं चाहता हूँ की तू याद आओ ,
मगर ये मुझे याद करने को मजबूर कर देता है
आप मेरी क्यों नहीं हो सकी
ये सोचने को जामुर कर देता है

हर इल्लम से चाहता हूँ तुझे सवारूँ
मगर गम न जाने क्यों चूर कर देता है
चाहत की खता हो गई है मुझसे
वरना दोस्ती की हदे भी चूर कर देता
तेरी याद .................

खायालें मुकमल जमकर पिया हूँ
वरना यादें यूँ ही भुला देता
आप कहते है तन्हाई से मत डरो
मुझे तन्हाई नहीं ,आप की यादें डरा देती है
तेरी याद........................

इन बज्म में लहू बनकर दौर रही हो
वरना अपने जिस्म से कब का निकल देता .
तेरी याद...................