तेरी याद हर तख़्त ताज को बेनूर कर देता है
मैं नहीं
चाहता हूँ की तू याद आओ ,
मगर ये मुझे
याद करने को मजबूर कर देता है
आप मेरी
क्यों नहीं हो सकी
ये सोचने को
जामुर कर देता है
हर इल्लम से
चाहता हूँ तुझे सवारूँ
मगर गम न
जाने क्यों चूर कर देता है
चाहत की खता
हो गई है मुझसे
वरना दोस्ती
की हदे भी चूर कर देता
तेरी याद
.................
खायालें
मुकमल जमकर पिया हूँ
वरना यादें
यूँ ही भुला देता
आप कहते है
तन्हाई से मत डरो
मुझे तन्हाई
नहीं ,आप की यादें डरा देती है
तेरी
याद........................
इन बज्म में
लहू बनकर दौर रही हो
वरना अपने
जिस्म से कब का निकल देता .
तेरी याद...................
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