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Tuesday, 30 August 2016

न पास है न साथ है
मोहबत की ये कैसी बात है
इससे अच्छा तो वो वक़्त था
जो हर रोज़ तीन पहर की मुलाक़ात था
न पास है न ......

वक़्त बीत चुका है मग़र ये न कहना
वो तब की बात थी
सारा ज़माना आज भी जानता है
इस मुफ़्लसी के आलम में आज भी वो रौशन रात है
न पास है.........

मुझे आज भी याद है
तेरे पल भर के ओझल से दिल डर सा जाता था
ये दीग़र बात थी
आपको न मेरी इंतहा न मेरी मोहब्बत से मुलाक़ात थी
न पास है .........
          -Binodanderson
            23:39

Saturday, 27 August 2016

ये ख़ुदा

ये ख़ुदा
मुझे भी अब ठेहरा दे
थक चूका हूँ दर बदर से
अब अपना सेहरा दे
मेरी सुखी सरज़मीं को
अब एक नई कलम का मिशरा दे
ये ख़ुदा........

अब तक भीड़ में तन्हाई थी
अब पूरा मुक्कमल जहां दे
चुप चाप सहता रहा जो तूने दिया
अब मुझे मेरे हिस्से की ख़ुशियाँ दे
ये ख़ुदा...........

दर्द दिया मुज़सिर में भी न शहर किया
क़बूल मुझे हर मंज़र तेरा, अब रहमें कर्म दे
आधी ज़िंदगी गुज़र गई आपके आफ़रीन को
मेरे रजनी को इनायतों का शहर दे
ये ख़ुदा ............

थक चुका हूँ अब इन रहबेरों से
मुझे सड़क का पता नहीं, अब शहर दे
इस अंधकार के रौनक रौशनी में
अब उजालों का पहर दे
ये ख़ुदा......
        -binodanderson
         23:59 (27/08/16)

बुझ गया है दिया

बुझ गया है दिया
मगर आग अभी बाकी है
वर्षो पहले जो जलाया था चराग़ यूँ ही
उसके गर्मी का आफ़ताब अभी बाक़ी है
बुझ गया है .....

लोग कहते है दुरी सबकुछ मिटा देती है
फिर ये यादों का सिलसिला क्यों बाक़ी है
हर वक़्त हर किसी में अक्स उसका नज़र आता है
आज भी मेरे नज़रों का प्यास अभी बाक़ी है
बुझ गया है .........

दिल को कसीस आज भी है उनके चले जाने का
तन्हाई में बस एक झलक की चाह बाक़ी है
आ जाओ लौट के अगर जाना ही था तो आये क्यों
तेरे इंतज़ार में सासों का चलना अभी बाकी है
बुझ गया है.....
        -binodanderson
         18:34 (27/08/16) for Rajesh

Monday, 22 August 2016

आज भी कोशिश जारी है

आज भी कोशिश जारी है
अपने मोहब्बत पाने की
न जाने क्या ख़ुदा ने लिखा है
एक भी पल नहीं छोड़ता है आजमाने की
आज भी......

इतना तो अब मैं भी जान गया हूँ
उनको मंज़ूर नहीं मेरे अफ़साने की
पर उनको नहीं मालूम है
मुझे भी मंज़ूर नहीं उनसे दूर जाने की
आज भी .......

अपना सारा लम्हा अब उनके ही साथ गुजरूँगा
मुझे खौफ़ नहीं ज़माने की
मेरे हर बेमौसम में मेरे साथ थी
कैसे भूल सकता हूँ ऐसे परवाने की
आज भी ..........

जब भी कमी महसूस हुआ, वो साथ दिखी
कैसे ख़ुद को रोक सकता हूँ
ऐसी हमनसी पाने की
दर्द मिले या मौत
हर फ़क्त मुझे मुस्तकबीर है उनको पाने की
आज भी ............
            -Binodanderson
             23rd Aug16 (9:08AM)

Thursday, 18 August 2016

हर लम्हा गुज़र रहा

पल पल में
हर लम्हा गुज़र रहा
ख़ामोश रहूँ या लड़ता रहूँ
पर वक़्त का ये सेहरा पहर रहा
पल पल........

सोचता हूँ
ये मैं क्या कर रहा
कल की चाह में
आज क्यूँ बिखर रहा
पल पल ..........

सवाल मेरा नहीं ज़माने का है
ख़ुद को ऊपर जो कर रहा
तेरे हर काम से वो नाराज़ रहे
चाहे लाख कोशिश क्यूँ न कर रहा
पल पल ..........

जिंदगी आधी गुज़र गई
फिर भी मैं (दूसरी छोड़ पे)
ईंट आज भी रख रहा
मालूम मुझे भी है
हर ईंट पे ईंट कम हो रहा
पर क्या करूँ
ज़माने की सोहबत में ख़ुद को ज़िला रहा
पल पल ........
          -Binodanderson
            18/08 /16
             22:51

Monday, 15 August 2016

राख़ बाक़ी है

जल चुका हूँ मैं
लेकिन राख़ बाक़ी है
औरों की तरह ही
मुझमे आग बाक़ी है
चाहे रूप रंग या भेष भाषा
अलग हो
फिर भी अखण्डता में एकता
की चाह बाक़ी है
जल चूका हूँ मैं

माना ग़रीबी अशिक्षा व्याप्त है आज भी
फिर भी उनके दिलों में देशप्रेम बाक़ी है
जनता हूँ  नेताओं ने लूटा है देश
फिर भी डेमोक्रेसी में विश्वास बाक़ी है
जल चूका हूँ मैं

Sunday, 14 August 2016

आज़ादी खुदमदगारों का नहीं

आजादी खुदमदगारो का नहीं
नेता और चाटुकारो का नहीं
बलिदानी की सर चढ़ी जो
वो जातिवाद या धर्म के ठेकेदारों का नहीं
आजादी खुद.......

ये देश है गरीब किसानों का
किसी साहूकारों का नहीं
नेता और चाटुकारों को कह दो
ये देश किसी के
बाप के जमींदारों का नहीं
आजादी ख़ुदमद......

शासन और सेवा में फ़र्क होता है
कोई उनको याद दिलाओ,
ऐसी नीति सेवकारो का नहीं
बड़े बड़े तो हर कोई बोले
सच में सार्थक विचारों का नहीं
आजादी ख़ुदमद........

देना है तो दो आजादी
शिक्षा के कर्ज़ से
भूख से प्यास से
छुआ छुत के अपमान से
गरीबी के शार्प से
अमीरी के अभिमान से
बातों के क़िताब से नहीं
आज़ादी खुदमदगारो  का नहीं
          -Binodanderson
           3:50AM

बेशर्म हो इतने....

बेशर्म हो इतने की
शर्म भी शरमा जाए
हर बार मुँह की खाके
बेहया -सा फिर उग आए
बेशर्म हो.......

ख़ुद के घर में आग नहीं
पर दूसरों के चिंगारी जलाए
अपनी जनता मरती है
फिर भी गर्व से उनको(आतंकी) दामाद बनाए
बेशर्म हो .........

कैसे कर लेते हो ये सब
सारी दुनियां थूक रही फिर भी बाहर घूमें जाए
तुमसे तो लाख भले वो है कम से कम
खुश ख़बरी में ढ़ोल बजाने घर आए
बेशर्म हो ..........

ख़ुद को संवारने में अगर वक़्त दो
तो सारी उल्फ़ते ख़त्म हो जाए
मानवता का धर्म समझ के
सारी दुनिया दोस्त हो जाए
बेशर्म हो ............
              -Binodanderson
                In metro civil line
                8:40AM

Friday, 5 August 2016

न दवा का सिरस है
न ही ज़हर का
मोहब्बत में ये कैसा शहर है
न साहिल पे हूँ न ही मिले किनारा
न दवा का सिरस है

बार बार मिलता हूँ
फिर भी कम पड़ता है सारा
कुछ कहते है ये उम्र का दोष है
मैं कभी नहीं चाहता ये सच हो
क्योंकि आधी उम्र उनके संग ही है गुज़ारा
न दवा का सिरस है न ज़हर का

क़ुर्बान है मेरी हर सांस
पाने को आपका एहसास सारा
एक ही चीज़ मुद्दतों से पाया है
खो नहीं सकता उसको दुबारा
न दवा सिरस है न ज़हर

         -Binodanderson
           4th August 16
           16:04 training in metro from laxmi nagar to gtb nagar

Monday, 1 August 2016

क्या कहु
कैसा हो गया हूँ
खिल गया हूँ
या उदास हो गया हूँ
क्या कहू

इक ज़िंदगी है
अनन्त इक्षाये
एक पूरी हो रही है
तो दूसरी खाश हो गया हूँ
क्या कहु

मेरा कसूर है या किस्मत का
अपनी ज़िंदगी तो सुर्ख है मानो
मरुस्थल का प्यास हो गया हूँ
हर बार साफ नज़र आता है मंज़िल
पास आते आते हताश हो गया हूँ
क्या कहू

हजार प्रश्न है पूछने को
आख़िर कहाँ कमी है
जो दर के करीब आके छुट जाता है
कोशिशें नाक़ाम होती जा रही है
इस तरह हर गम का आफ़ताब हो गया हूँ
क्या कहु......
              -Binodanderson
                12:11AM ,2nd August 16