तू ग़ैर की न थी
तो ग़ैर हो गई
तू दूर क्या गई
अपनी क़िस्मत भी बैर हो गई
मुक़म्मल जहाँ अपना होता
अब तो काश की ज़िंदगी शहर हो गई
क्या कहूँ तुझे या ख़ुदा को
जब अपने ही अपनों कि तोहमत हो गई
-Binodanderson
25th May17 (11:04)
Traveling to Delhi
Wednesday, 24 May 2017
Friday, 19 May 2017
एहसास अभी बाक़ी है
हर दर्द का एहसास बाक़ी है
गुज़र गया है वक़्त निशां अभी बाक़ी है
धुँधले से वक़्त ऐसी चमक दिखाई
उड़ गया है हर रंग ,उनकी परछाई अभी बाक़ी है
हर दर्द
मज़बूत कर रहा है हर चोट मुझे
मेरी शख़्सियत का अक्स अभी बाक़ी है
मैं जानता हूँ तू न रुकेगा यू दर्द देने से
कभी मुफ़्लिशी में हूँ मग़र निकलना अभी बाक़ी है
हर दर्द
देख ली मंज़र कई मैंने भी मग़र
मेरी ज़िंदगी का कल आना अभी बाक़ी है
ज़िल्लतों में मैं नहीं मरूँगा याद रख
मेरी रंजो श्रम की सांस अभी बाक़ी है
हर दर्द...........
-Binodanderson (20/05/17)
M Nagar 9:15AM
Thursday, 11 May 2017
रहबेरों में यूं
रहगुज़र हुए है
मालूम नहीं
किधर शहर हुए है
जिधर ढूंढोगे नही मिलेंगे
न जाने कहाँ सिफ़र हुए है
मोहताज़ नही है जिंदगी किसी नाम की
बस वक़्त के दोपहर हुए है
वरना चाहते तो थे हम भी बहुत कुछ
गम की आंसू में हंसी सी महर हुए है
देखते और क्या क्या रंग दिखाती है जिंदगी
उजले लिबास में कूची सहर हुए है
-Binodanderson
Allahabad (11/05/17)
Tuesday, 9 May 2017
Monday, 8 May 2017
आज फिर दिल उदास है
कोई दस्तक़ देके रखा न पास है
उम्मीद का दामन थामे रखा है
फिर भी कुछ कमी रह गई जो न पास है
सांसों की डोर को
हर कदम बनाया विश्वास है
बिखरते रहे है उम्मीदों के जज़्बात
छोड़ नही सकता ,लड़ाई अपनी बहुत ख़ास है
फ़क्र है मुझें ख़ुद पे अपने दोस्तों पे
शहर के रहबेरों में मेरे पास थे और हैं
ईक इनायत तू भी करदे मौला
जिसकी मुझें अब तक प्यास है
-Binodanderson (8/5/17)
18:36, M.nagar