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Wednesday, 24 May 2017

तू ग़ैर की न थी
तो ग़ैर हो गई
तू दूर क्या गई
अपनी क़िस्मत भी बैर हो गई
मुक़म्मल जहाँ अपना होता
अब तो काश की ज़िंदगी शहर हो गई
क्या कहूँ तुझे या ख़ुदा को
जब अपने ही अपनों कि तोहमत हो गई
                   -Binodanderson
                     25th May17 (11:04)
                     Traveling to Delhi

Friday, 19 May 2017

एहसास अभी बाक़ी है

हर दर्द का एहसास बाक़ी है
गुज़र गया है वक़्त निशां अभी बाक़ी है
धुँधले से वक़्त ऐसी चमक दिखाई
उड़ गया है हर रंग ,उनकी परछाई अभी बाक़ी है
हर दर्द

मज़बूत कर रहा है हर चोट मुझे
मेरी शख़्सियत का अक्स अभी बाक़ी है
मैं जानता हूँ तू न रुकेगा यू दर्द देने से
कभी मुफ़्लिशी में हूँ मग़र निकलना अभी बाक़ी है
हर दर्द

देख ली मंज़र कई मैंने भी मग़र
मेरी ज़िंदगी का कल आना अभी बाक़ी है
ज़िल्लतों में मैं नहीं मरूँगा याद रख
मेरी रंजो श्रम की सांस अभी बाक़ी है
हर दर्द...........
                -Binodanderson (20/05/17)
                 M Nagar  9:15AM

Thursday, 11 May 2017

रहबेरों में यूं
रहगुज़र हुए है
मालूम नहीं
किधर शहर हुए है
जिधर ढूंढोगे नही मिलेंगे
न जाने कहाँ सिफ़र हुए है
मोहताज़ नही है जिंदगी किसी नाम की
बस वक़्त के दोपहर हुए है
वरना चाहते तो थे हम भी बहुत कुछ
गम की आंसू में हंसी सी महर हुए है
देखते और क्या क्या रंग दिखाती है जिंदगी
उजले लिबास में कूची सहर हुए है
      -Binodanderson
       Allahabad (11/05/17)

हर शहर
तेरा इंतज़ार
अब कब तक
देना पड़ेगा अपना करार
हर शहर
दिल भी हो रहा
अब बेकरार
अपनी आंखें भी
नही कर रही कोई सहर
सांसे लेना जिंदग़ी मत बना
मंज़िल को कर मुझे मेहर
यूँ गुफ़्तगू करके

Tuesday, 9 May 2017

थोड़ा थोड़ा ज़िंदगी
जी रहे है
कहाँ ख्वाहिशें भी
रुक रुक के जी रहे है
दूर खड़ी होके
यूँ ही खीज़ रहे है
थोड़ा थोड़ा

अचानक ही कभी कभी
उम्मीद का सम्मा बांध रहे है
दर्द ज़ख्म को भुला के
फ़िर से पंखुड़िया अवतार ले रहा है
थोड़ा थोड़ा.....

Monday, 8 May 2017

आज फिर दिल उदास है
कोई दस्तक़ देके रखा न पास है
उम्मीद का दामन थामे रखा है
फिर भी कुछ कमी रह गई जो न पास है

सांसों की डोर को
हर कदम बनाया विश्वास है
बिखरते रहे है उम्मीदों के जज़्बात
छोड़ नही सकता ,लड़ाई अपनी बहुत ख़ास है

फ़क्र है मुझें ख़ुद पे अपने दोस्तों पे 
शहर के रहबेरों में मेरे पास थे और हैं
ईक इनायत तू भी  करदे मौला
जिसकी मुझें अब तक प्यास  है
            -Binodanderson (8/5/17)
             18:36, M.nagar

Saturday, 6 May 2017

ज़िन्दगी नूर से बेनूर है
सपने आपने आप मे अब भी चूर है
वक़्त की तोहमत तो देखिए
उम्र हो चुकी है फिर कुछ कर गुज़रने को मज़बूर है
                 -Binodanderson    

Thursday, 4 May 2017

हर बार यूं करीब लाके
छोड़ता क्यूँ है
देखता हूँ इस बार इस साहिल से
मिलता क्या है ....