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Monday, 8 May 2017

आज फिर दिल उदास है
कोई दस्तक़ देके रखा न पास है
उम्मीद का दामन थामे रखा है
फिर भी कुछ कमी रह गई जो न पास है

सांसों की डोर को
हर कदम बनाया विश्वास है
बिखरते रहे है उम्मीदों के जज़्बात
छोड़ नही सकता ,लड़ाई अपनी बहुत ख़ास है

फ़क्र है मुझें ख़ुद पे अपने दोस्तों पे 
शहर के रहबेरों में मेरे पास थे और हैं
ईक इनायत तू भी  करदे मौला
जिसकी मुझें अब तक प्यास  है
            -Binodanderson (8/5/17)
             18:36, M.nagar

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