तेरे इंतज़ार में
क्या से क्या हो गया हूँ
ख़ाली पिली सोच के
झूट मूठ में कितना मोटा हो गया हूँ
मज़बूरी कह लो या फिर तुम्हारी आदत
अपनी ही फ़ितरतो में यूँ घुल सा गया हूँ
तेरे इंतज़ार में .....
तू कितनी पास रहती है
फिर भी हर लम्हा गुफ़्तगू की तकलुफ हो गया हूँ
तू कितनी ही हिदायतें दे दो
तेरे एहसास का यूँ कायल हो गया हूँ
तेरे इंतज़ार में ............
हाँ मैं पागल हूँ
कोशिशों में ख़ुद को भूल सा गया हूँ
तेरे लिए ही
तेरे ही तस्वीर में तासीर हो गया हूँ
तेरे इंतज़ार में.............
न जाने ख़ुदा ने ऐसा क्यूँ बनाया
इतने काटों के बीच ही प्यार के फूल क्यूँ लगाया
एक जाती नहीं की
लाखों मुसिबतों से रु-आबरू हो गया हूँ
ऐसे रहबरों में राही बन गया हूँ
तेरे इंतज़ार में .......
-Binodanderson
28th March17