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Sunday, 26 March 2017

तेरे इंतज़ार में

तेरे इंतज़ार में
क्या से क्या हो गया हूँ
ख़ाली पिली सोच के
झूट मूठ में कितना मोटा हो गया हूँ
मज़बूरी कह लो या फिर तुम्हारी आदत
अपनी ही फ़ितरतो में यूँ घुल सा गया हूँ
तेरे इंतज़ार में .....

तू कितनी पास रहती है
फिर भी हर लम्हा गुफ़्तगू की तकलुफ हो गया हूँ
तू कितनी ही हिदायतें दे दो
तेरे एहसास का यूँ कायल हो गया हूँ
तेरे इंतज़ार में ............

हाँ मैं पागल हूँ
कोशिशों में ख़ुद को भूल सा गया हूँ
तेरे लिए ही
तेरे ही तस्वीर में तासीर हो गया हूँ
तेरे इंतज़ार में.............

न जाने ख़ुदा ने ऐसा क्यूँ बनाया
इतने काटों के बीच ही प्यार के फूल क्यूँ लगाया
एक जाती नहीं की
लाखों मुसिबतों से रु-आबरू हो गया हूँ
ऐसे रहबरों में राही बन गया हूँ
तेरे इंतज़ार में .......
               -Binodanderson
                28th March17

Tuesday, 21 March 2017

मेरे हर दर्द से तकलीफ़ में तू
तेरे हर ग़म से मसरूफ़  मैं
मेरे हर हँसी के पीछे छुपी दास्ताँ जान लेती है तू
तेरी ख़ामोशी से  मगरुफ़ मैं

Monday, 20 March 2017

न ख़ुद से मोहब्बत है

किसी से कोई शिकायत नहीं
न ख़ुद से मोहब्बत है
ज़िन्दगी का भी कोई ग़िला नहीं
चाहे आँकड़े की क्यूँ न क़िल्लत है

इनायत भी करके क्या मिला
दर्द देने की जो उनकी फ़ितरत है
नासाज़ ही अब मैं अच्छा हूँ
मंज़ूर मुझको मेरी क़िस्मत है
किसी से कोई शिकायत नहीं
न ख़ुद से मोहब्बत है ..

हर घाट पे दस्तक़ दी
उम्मीदों में जीने की जो आदत है
मन प्यासे प्याले सी कोशिश की
आपको मानने की जो सिद्दत है
किसी से कोई शिकायत नहीं
न ख़ुद से मोहब्बत है ...

अब तो पिघल जा बेपीर सा क्यूँ खड़ा है
पवन प्यारी हो रही  जो मेरी हिम्मत है
सूखे में सावन बन वर्षा जा
कुंठित स्वर की जो इनायत है
किसी से कोई शिकायत नहीं
न ख़ुद से मोहब्बत है .......
                - Binod Anderson 19:28
                   M nagar (20th March17)

Tuesday, 14 March 2017

रंगों की जो कल बरसात हुई
आप की हमारी जो बात हुई
अरसों बीत गए फ़ागुन
लेकिन कल वाली feelings की न रात हुई।

मेरी कहानी तो बस तुमसे है
मोहब्बत की इरादतन जो साथ हुई

Tuesday, 7 March 2017

हर दर्दे ज़ुबाँ की दास्तां अधूरी रह गई है
ख़ुदा की खुदाई भी ज़रूरी हो गई है
आज भी परेशान है दुनियां ख़ुद को बनाने में
लगता हो जैसे जीना ही कोई मज़बूरी हो गई है

सिले हुए लबों को आज़ाद करो

   
तुम ख़ामोश रहके न ख़ामोश रहो
सिले हुऐ लबों को आजाद करो
जिंदगी किसी हुकुमगरों की मोहताज़ नहीं
खुली प्रकृति में खुलके आगाज़ करो
सिले हुऐ लबों.......

मैं मानता हूँ बहुत तकलीफ़े आयेंगी
इन सब का न तुम परवाह करो
हर किसी में कहाँ है दम अपनी ही जिंदगी जीने का
हर वीर परवीर हिमालय सा निरन्तर प्रहार करो
सिले हुऐ लबों........

उठ रहा है तूफ़ान हर किसी ओर
डरो मत बस बिजली सा व्यवहार करो
जीत - हार की परवाह नहीं बस
अपनी शर्तों पे ख़ुद का न्याय करो
सिले हुए लबों ..........
             -Binodanderson
              1st March 17(8:39)