किसी से कोई शिकायत नहीं
न ख़ुद से मोहब्बत है
ज़िन्दगी का भी कोई ग़िला नहीं
चाहे आँकड़े की क्यूँ न क़िल्लत है
इनायत भी करके क्या मिला
दर्द देने की जो उनकी फ़ितरत है
नासाज़ ही अब मैं अच्छा हूँ
मंज़ूर मुझको मेरी क़िस्मत है
किसी से कोई शिकायत नहीं
न ख़ुद से मोहब्बत है ..
हर घाट पे दस्तक़ दी
उम्मीदों में जीने की जो आदत है
मन प्यासे प्याले सी कोशिश की
आपको मानने की जो सिद्दत है
किसी से कोई शिकायत नहीं
न ख़ुद से मोहब्बत है ...
अब तो पिघल जा बेपीर सा क्यूँ खड़ा है
पवन प्यारी हो रही जो मेरी हिम्मत है
सूखे में सावन बन वर्षा जा
कुंठित स्वर की जो इनायत है
किसी से कोई शिकायत नहीं
न ख़ुद से मोहब्बत है .......
- Binod Anderson 19:28
M nagar (20th March17)
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