" Copyright is reserve to the writer "

Monday, 13 February 2017

ये मुझे क्या हो गया

ये मुझें क्या हो गया
धड़कने भी पराया सा लगे
पल भर की ये तेरी दुरी
कितना बुरा सा लगे
ये........

ख़ामोशी में दिल ये कहे
उसकी कमी से दिन क्यूँ ढला सा लगे
अश्क़ की आशिक़ी भी अजीब है
अपनी आँखों से निकले पर पराया सा लगे
ये.........

खुशियाँ तलाशने निकाला
पर ये गम तो अपना सा लगे
दूर खड़ी हो अंजान सा बन के
तुझें क्या पता ,अपनी जिंदगी ही पराया सा लगे
ये ...........

वक़्त की डोर भी कैसी है
छूटता हुआ पल कितना प्यारा सा लगे
आने वाला कल
कितना बेगाना सा लगे
ये मुझे.............
                 -Binodanderson
                  M.nagar, 21:00

Friday, 3 February 2017

घबड़ा गई है ज़िंदगी
मेरे मय्यसर को देखके
न जाने कब खुलेगी तेरी आँखे
मेरे मुक्कदर को देख के

बस आँखें पत्थरा -सी गई है
घुटने नहीं टेके है मुसीबत को देख के
तू अपनी फ़ितरत से मशगूल रह
मैं लड़ता रहूँगा अपनी मेहनत को देखके

तू चूर कर सकता है मुझे, मज़बूर नहीं
इक दिन तू भी मानेगा ,हिम्मत को देखके
जल्द ही वो कसीदों की हसीं राते मेरी होंगी
फिर तू मुस्कुराएगा रंज के रौशन को देखके
           - Binodanderson
              3rd feb 17 (M.nagar)