ये मुझें क्या हो गया
धड़कने भी पराया सा लगे
पल भर की ये तेरी दुरी
कितना बुरा सा लगे
ये........
ख़ामोशी में दिल ये कहे
उसकी कमी से दिन क्यूँ ढला सा लगे
अश्क़ की आशिक़ी भी अजीब है
अपनी आँखों से निकले पर पराया सा लगे
ये.........
खुशियाँ तलाशने निकाला
पर ये गम तो अपना सा लगे
दूर खड़ी हो अंजान सा बन के
तुझें क्या पता ,अपनी जिंदगी ही पराया सा लगे
ये ...........
वक़्त की डोर भी कैसी है
छूटता हुआ पल कितना प्यारा सा लगे
आने वाला कल
कितना बेगाना सा लगे
ये मुझे.............
-Binodanderson
M.nagar, 21:00