घबड़ा गई है ज़िंदगी
मेरे मय्यसर को देखके
न जाने कब खुलेगी तेरी आँखे
मेरे मुक्कदर को देख के
बस आँखें पत्थरा -सी गई है
घुटने नहीं टेके है मुसीबत को देख के
तू अपनी फ़ितरत से मशगूल रह
मैं लड़ता रहूँगा अपनी मेहनत को देखके
तू चूर कर सकता है मुझे, मज़बूर नहीं
इक दिन तू भी मानेगा ,हिम्मत को देखके
जल्द ही वो कसीदों की हसीं राते मेरी होंगी
फिर तू मुस्कुराएगा रंज के रौशन को देखके
- Binodanderson
3rd feb 17 (M.nagar)
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