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Monday, 13 February 2017

ये मुझे क्या हो गया

ये मुझें क्या हो गया
धड़कने भी पराया सा लगे
पल भर की ये तेरी दुरी
कितना बुरा सा लगे
ये........

ख़ामोशी में दिल ये कहे
उसकी कमी से दिन क्यूँ ढला सा लगे
अश्क़ की आशिक़ी भी अजीब है
अपनी आँखों से निकले पर पराया सा लगे
ये.........

खुशियाँ तलाशने निकाला
पर ये गम तो अपना सा लगे
दूर खड़ी हो अंजान सा बन के
तुझें क्या पता ,अपनी जिंदगी ही पराया सा लगे
ये ...........

वक़्त की डोर भी कैसी है
छूटता हुआ पल कितना प्यारा सा लगे
आने वाला कल
कितना बेगाना सा लगे
ये मुझे.............
                 -Binodanderson
                  M.nagar, 21:00

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