तुम ख़ामोश रहके न ख़ामोश रहो
सिले हुऐ लबों को आजाद करो
जिंदगी किसी हुकुमगरों की मोहताज़ नहीं
खुली प्रकृति में खुलके आगाज़ करो
सिले हुऐ लबों.......
मैं मानता हूँ बहुत तकलीफ़े आयेंगी
इन सब का न तुम परवाह करो
हर किसी में कहाँ है दम अपनी ही जिंदगी जीने का
हर वीर परवीर हिमालय सा निरन्तर प्रहार करो
सिले हुऐ लबों........
उठ रहा है तूफ़ान हर किसी ओर
डरो मत बस बिजली सा व्यवहार करो
जीत - हार की परवाह नहीं बस
अपनी शर्तों पे ख़ुद का न्याय करो
सिले हुए लबों ..........
-Binodanderson
1st March 17(8:39)
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