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Tuesday, 30 August 2016

न पास है न साथ है
मोहबत की ये कैसी बात है
इससे अच्छा तो वो वक़्त था
जो हर रोज़ तीन पहर की मुलाक़ात था
न पास है न ......

वक़्त बीत चुका है मग़र ये न कहना
वो तब की बात थी
सारा ज़माना आज भी जानता है
इस मुफ़्लसी के आलम में आज भी वो रौशन रात है
न पास है.........

मुझे आज भी याद है
तेरे पल भर के ओझल से दिल डर सा जाता था
ये दीग़र बात थी
आपको न मेरी इंतहा न मेरी मोहब्बत से मुलाक़ात थी
न पास है .........
          -Binodanderson
            23:39

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