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Sunday, 14 August 2016

बेशर्म हो इतने....

बेशर्म हो इतने की
शर्म भी शरमा जाए
हर बार मुँह की खाके
बेहया -सा फिर उग आए
बेशर्म हो.......

ख़ुद के घर में आग नहीं
पर दूसरों के चिंगारी जलाए
अपनी जनता मरती है
फिर भी गर्व से उनको(आतंकी) दामाद बनाए
बेशर्म हो .........

कैसे कर लेते हो ये सब
सारी दुनियां थूक रही फिर भी बाहर घूमें जाए
तुमसे तो लाख भले वो है कम से कम
खुश ख़बरी में ढ़ोल बजाने घर आए
बेशर्म हो ..........

ख़ुद को संवारने में अगर वक़्त दो
तो सारी उल्फ़ते ख़त्म हो जाए
मानवता का धर्म समझ के
सारी दुनिया दोस्त हो जाए
बेशर्म हो ............
              -Binodanderson
                In metro civil line
                8:40AM

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