आज भी कोशिश जारी है
अपने मोहब्बत पाने की
न जाने क्या ख़ुदा ने लिखा है
एक भी पल नहीं छोड़ता है आजमाने की
आज भी......
इतना तो अब मैं भी जान गया हूँ
उनको मंज़ूर नहीं मेरे अफ़साने की
पर उनको नहीं मालूम है
मुझे भी मंज़ूर नहीं उनसे दूर जाने की
आज भी .......
अपना सारा लम्हा अब उनके ही साथ गुजरूँगा
मुझे खौफ़ नहीं ज़माने की
मेरे हर बेमौसम में मेरे साथ थी
कैसे भूल सकता हूँ ऐसे परवाने की
आज भी ..........
जब भी कमी महसूस हुआ, वो साथ दिखी
कैसे ख़ुद को रोक सकता हूँ
ऐसी हमनसी पाने की
दर्द मिले या मौत
हर फ़क्त मुझे मुस्तकबीर है उनको पाने की
आज भी ............
-Binodanderson
23rd Aug16 (9:08AM)
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