ख़ालिस है या ख़ता है
गुमनामी में हूँ या नशा है
तू कुछ कहता क्यूँ नहीं
इस मर्ज़ी की वज़ह क्या है
ख़ामोश दर्द की इंतहा क्या है
टुकड़ो में ज़िन्दगी की वज़ह क्या है
कहते है लोग ,वक़्त पे सब कुछ मिल जाता है
तो रहबेरों में चुन्ने की वज़ह क्या है
या तो तू है जो ये सब चलाता है
सृस्टि या हमारे जैसे को घुमाता है
साफ़ साफ़ क्यों नहीं कहता कसुर क्या है
आख़िर क्यूँ मुझें इतना भटकाता है
कहते है तेरे घर में देर है अँधेर नहीं
मगर मैं पूछता हूँ वो वक़्त कहाँ है अब तक
जिसके इंतज़ार में रंजनी हो चला है ये नयन
अगर देना ही तो इतना क्यूँ सताता है
ख़ालिस है या ख़ता है ........
-Binodanderson
7/12/16(23:30)
M nagar
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