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Saturday, 30 July 2016

दर्द को कब तक बेचता रहेगा

जिंदगी के दर्द को
कब तक बेचता रहेगा
मरहम  की आड़ में
सेंकता रहेगा
जिंदगी के दर्द....
उठ खड़ा हो ,सामना कर
दर्द और मर्ज़ की परवाह छोड़
कब तक किस्मत को कोसता रहेगा
वक़्त के साथ चल न आराम कर
मंजिल के पहले न विश्राम कर
मंझधार में कब तक टहलता रहेगा
ज़िन्दगी के दर्द......
एक साँस में पूरी न जी पायेगा
आधे पे रुका तो भी पचतायेगा
यूँ दुरी और गहराई को देख के न डर
अगर डरा तो क्या पूरी ज़िन्दगी जी पायेगा
ज़िन्दगी के दर्द को
कब तक बेचता रहेगा
              -Binodanderson
               21:18 (5th August 16)

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