जिंदगी के दर्द को
कब तक बेचता रहेगा
मरहम की आड़ में
सेंकता रहेगा
जिंदगी के दर्द....
उठ खड़ा हो ,सामना कर
दर्द और मर्ज़ की परवाह छोड़
कब तक किस्मत को कोसता रहेगा
वक़्त के साथ चल न आराम कर
मंजिल के पहले न विश्राम कर
मंझधार में कब तक टहलता रहेगा
ज़िन्दगी के दर्द......
एक साँस में पूरी न जी पायेगा
आधे पे रुका तो भी पचतायेगा
यूँ दुरी और गहराई को देख के न डर
अगर डरा तो क्या पूरी ज़िन्दगी जी पायेगा
ज़िन्दगी के दर्द को
कब तक बेचता रहेगा
-Binodanderson
21:18 (5th August 16)
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Saturday, 30 July 2016
दर्द को कब तक बेचता रहेगा
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