तुम वो नहीं
जिसको जानते है
आज भी लोग
खुद को न पहचानते है
जमाना चाँद तक जा पहुँचा है
मगर आज भी इंसान इंसान को धुत्कारते है
तुम वो नहीं
ज़िंदगी गुज़र जाती है ख़ुद को बनाने में
आज भी ख़ुद को तामिल
औरों को कबाड़ मनाते है
देखो ज़रा इनका रुतबा
अपने दर्द पे मरहम, दूसरों पे नमक डालते है
तुम वो नहीं
बिना ज़ुबां की समझ नहीं तुझे
लेकिन अपने इंसानियत को तो जानता है
नहीं डरता हो अगर ख़ुदा से
मगर अपनी जन्म को तो मानता है
तुम वो नहीं
-Binodanderson
21:37PM,20/07/2016
No comments:
Post a Comment