वर्षो गुज़र गए
न हम सुधरे न तुम सुधरे
आज भी मैं सोचता हूँ
तुम कहाँ ठहरे हम कहाँ ठहरे
वर्षो ........
क्या कहूँ
गुस्ताख़ी किसकी है
कभी किसी बात को तुम पकड़े
कभी हम पकड़े
अपने प्यार का पेड़ है मजबूत
तभी तो आज तक है जकड़े
मगर टहनी न जाने बात बात ये क्यों अकड़े
वर्षो ......
9/7/16=21:42 Mukharji nagar
No comments:
Post a Comment