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Thursday, 7 July 2016

मैं बंधना नहीं चाहता

मैं बंधना नहीं चाहता
इस 9 से 5 में
ख्वाहिशों को रोक नहीं सकता
इस खुले आकाश में
ज़िंदगी बोझ-सी होगी
इस Duty और responsibility के क्लेश में
मैं बंधना नहीं चाहता .........

और भी तरीक़े होंगे जीने के
जी नहीं सकता सिर्फ़ अवकाश में
इक बार मिलती है ज़िंदगी
इसको छोड़ नहीं सकता यूँ उम्मीदों के आस में
मैं बंधना नहीं चाहता ......

मैं उड़ना चाहता हूँ
इस उन्मुक्त गगन के प्यास में
जिन्दा रखना चाहता हूँ ,ख्वाहिशें कुछ अपने कुछ दूसरों के
मरना नहीं चाहता सिर्फ भोग विलास  में
मैं बंधना नहीं चाहता
सिर्फ 9 से 5 में

             -Binodanderson
               5th-July, 16
              Mukharji nagar

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