वो कहानी
अब, मैं भी बन गया हूँ
अधूरी दास्ताँ में
इस कदर सन गया हूँ
सुना बहुत था
जिंदगी में के बारे में
अब मैं भी उसी का
हिस्सा बन गया है
पिघले वक़्त में
ऐसे ठिठुर गया हूँ
साँस तो अपनी ही जगह है
बस मैं ही हिल गया हूँ
कहते है मरने के बाद
ज़िस्म बेपीर हो जाता है
ऐसा तो मैं जीते जी
बन गया हूँ
गम न थी
कभी मुख़ातिब
मनो अब तो
गम में ही घुल गया हूँ
एक कांच सी थी चमक
तेरे आने से
अब
अंधकार सा बिखर गया हूँ
इनायत ख़ुदा से इतनी करता हूँ
तू मिल जाय,बग़ैर तेरे तो जीना
मुमकिन नहीं
इस कदर तुझमें
जो फ़ना हो गया हूँ
तेरी यादों से
लड़ लड़के
जख़्म का असर कहा
तेरी मोहब्बत में इसकदर बेपीर
बन गया हूँ
फासलों में रह कर
जो राहगीर बना ,मनो
दरम्यां में ही कही ग़ुम हो गया हूँ
Continued
28th April, 2016
अब, मैं भी बन गया हूँ
अधूरी दास्ताँ में
इस कदर सन गया हूँ
सुना बहुत था
जिंदगी में के बारे में
अब मैं भी उसी का
हिस्सा बन गया है
पिघले वक़्त में
ऐसे ठिठुर गया हूँ
साँस तो अपनी ही जगह है
बस मैं ही हिल गया हूँ
कहते है मरने के बाद
ज़िस्म बेपीर हो जाता है
ऐसा तो मैं जीते जी
बन गया हूँ
गम न थी
कभी मुख़ातिब
मनो अब तो
गम में ही घुल गया हूँ
एक कांच सी थी चमक
तेरे आने से
अब
अंधकार सा बिखर गया हूँ
इनायत ख़ुदा से इतनी करता हूँ
तू मिल जाय,बग़ैर तेरे तो जीना
मुमकिन नहीं
इस कदर तुझमें
जो फ़ना हो गया हूँ
तेरी यादों से
लड़ लड़के
जख़्म का असर कहा
तेरी मोहब्बत में इसकदर बेपीर
बन गया हूँ
फासलों में रह कर
जो राहगीर बना ,मनो
दरम्यां में ही कही ग़ुम हो गया हूँ
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28th April, 2016
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