" Copyright is reserve to the writer "

Sunday, 24 April 2016

चलो चले हम तुम वहाँ
सुबह भी हसीन हो रात सा जहाँ
दर्द क्या, ख़ामोशी की भी
न हो कोई निशां
अँधेरा भी उजालों सा हो जहाँ

चेहरों पे एक अलग सा नूर हो
तिनकों के सहारे न कोई मज़बूर हो
इनायत के न पहरेदार हो
ख़ुशनुमा हो हर पल जहाँ
चलो चले हम तुम वहाँ

भेद भाव का न रिश्ता वहाँ
मिलते हो बस प्यार जहाँ
दूरियों का न फासला हो
हम-तुम जी सके पल सुकूँ के जहाँ
चलो चले हम तुम वहाँ

हर कोई रहना चाहे वहाँ
सुक़ून के पल हो दरम्यां
दोस्ती की न करनी पड़े
पहचान जहाँ
चलो चले हम तुम वहाँ

:-Binodanderson
13th April, 2016

No comments:

Post a Comment