मोहब्बत क्या है ?
आवारगी ,दीवानापन
या संस्कृति या संस्कार
औचित या अनुचित प्रतिकार
इज़हार या दरार
प्रकृति या तिरस्कार
अगर आत्माओं का मिलन है
तो समाज क्यों नहीं कर रहा स्वीकार
क्यों छुब्द है समाज
कहा गया वो राधा-कृष्ण की लीला
क्यों करते है गुणगान
क्यों ढोल-मंजीरा बजा कर
बढ़ाते अपनी शान
क्यूँ मीरा की धुन सुन खुश हो जाता इंसान
क्यूँ पाखंड-सा है व्यवहार
सामने मुस्कुराहट ,पीछे है धिकार
मोहब्बत क्या .....
समाज इसको जटिलता में पिरो कर
दर्द की करवाहट से साना है
राधा-कृष्ण क्या करे
वो तो खुद स्तब्ध है
देखकर यह व्यवहार
आखिर कैसा है समाज का प्यार
दोमुहां है अवतार
ख़ामोश तमाशा देख
देते स्टार चार
इसलिए आज भी है
हम सब में है अंधकार
ढोंग छल से ओत प्रोत
अपनी सखी करते बघार
प्रकृति के शीतल अमृत का
हमेश करते बहिष्कार
इसलिए आज भी हम सब में अंधकार
क्या है ...........
:-21st
July2015
1:35 Am “Patna”
‘
No comments:
Post a Comment