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Saturday, 26 November 2016

हर बार गलतियां
मैं क्यूँ करता हूँ
मैं ही क्यूँ तुझे
खोने से डरता हूँ
हर बार

अपनी गलतियां मैं
फिर भी मन लेता हूँ
सही ग़लत के फ़र्क में
रिश्ता टूटने से डरता हूँ
हर बार

मर्ज़ हर बार मैं सहता हूँ
ख़ामोश रहके भी मुसुकुरता हूँ
जिस दिन चला जाऊंगा छोड़ के
साहिल पे दम तोड़ दोगी जनता हूँ

             2:22AM (27/11/16)

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