हर बार गलतियां
मैं क्यूँ करता हूँ
मैं ही क्यूँ तुझे
खोने से डरता हूँ
हर बार
अपनी गलतियां मैं
फिर भी मन लेता हूँ
सही ग़लत के फ़र्क में
रिश्ता टूटने से डरता हूँ
हर बार
मर्ज़ हर बार मैं सहता हूँ
ख़ामोश रहके भी मुसुकुरता हूँ
जिस दिन चला जाऊंगा छोड़ के
साहिल पे दम तोड़ दोगी जनता हूँ
2:22AM (27/11/16)
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