" Copyright is reserve to the writer "

Tuesday, 11 October 2016

हर दर्द की तासिर है मुझमें
गुज़रे जमाना का फ़क़ीर है मुझमे
बनाने वाले ने न जाने क्या सोच कर बनाया
हर बदनसीब का तस्वीर है मुझमें

No comments:

Post a Comment