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Friday, 16 March 2012

भुखमरी व लाचारी की ये जो आंच है


भुखमरी व लाचारी की ये जो आंच है
गरीब के पेट पे तमाच है
भ्रष्ट्राचार की ये सांच है
सरकार की ये जो नाच है
भुखमरी.........................


अज्ञानता व अशिक्षा का जो सांप है
डस रहा ये समाज है
लुट खसोट के जनता से
Swiss में बना रहा जो ताज है
भुखमरी ........................

हम जिन्हें पहनाते ताज है
वो ही गिराता हम सब पर गाज है
जनता से सरोकार नहीं
जितना हो लुट लो भाई ,बाप का ये राज़ है
भुखमरी .........................


Election में इनका बड़ा काज है
वोट मांगने में न इनको लाज है
वादों की लड़ी लगा के
भूल जाते कहा का ये साज़ है
भुखमरी ................................

संसद में न कोई करते काम
आम लोगों को भड़काना इनका काम
अंधकार में दौर लगा
कहते है हम तो आवाम के अंदाज़ है
भुखमरी......................................
                                  16th mar ,1:54am

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