जब तुम्हे नहीं देख पाता हूँ
बस सपनो में खोया रहता हूँ
दिलसे यही फ़रियाद होता,
तुम होती तो कैसा होता
लड़खड़ाए जुबां पे जब नाम तुम्हारा आता
तो मैं खोया जाग कर
सपनो की दुनिया से भाग कर
सरे गम को भूल कर
बस यही सोचता कहता
तुम होती तो कैसा होता
तरसती निगाहों के सामने आती
फूल कलि सभी खिल जाती
चेहरे पे खुशी की दमक आ जाती
गम के आंशु पिरोये जाते
जब नाम तुम्हारा आता
तुम होती तो कैसा होता
रात ढलती सुबह हो जाती
सूरज भी अपनी रोशनी फैलती
अपने खाट छोर के
सुबह की बेला घूम घोर के
बस याद तुम्हरी ही आती
तुम होती तो कैसा होता ...............
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