हमेशा
यूँ ही होता है
दिल के काल कोठरी में
कोई राहगीर
कोई बेपीर
अचानक बेइरादा
जलते दीपक-सा चमकता है
तेरा चेहरा झलकता है
इसी दीपक के रौशनी में
कभी अंधकार में
रौशनी के फरिश्तों-सा
बिना लफ्ज पूरी कहानी के साथ
तेरा चेहरा झलकता है
सुलगते दिल की बस्ती में
जलते गम की आंधी में
विनोद के विनोद में
मेस में क्लास में
ख्वाब्ब के प्लेट में
कभी गम के रास में
तेरा चेहरा झलकता है
जब दिल के काल कोठरी में
दीपक जलता प्रतीत होता है
खुला कागज-कलम
नया मिसरा बन निकलता है
यूँ ही मेरा दिन गुजरता है
हमेशा
यूँ ही होता है .................
तेरा चेहरा झलकता है
No comments:
Post a Comment