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Thursday, 15 March 2012

तुम्हे, क्या फर्क पड़ता है


तुम्हे ,क्या फर्क पड़ता है
कोई खाए या भूखे सो जाये
कोई पिए या प्यासे रह जाये
कोई धरा के आगोश में खो जाये
तुम्हे, क्या .................................

                               
गरीबी हो ,भर्ष्टाचार हो,अंधकार में समाज हो  
सोते को सुलाते रहो
भर्ष्टाचार को आंच लगाते रहो
गरीबो को गरीबी से,सोफे वालों का जेब गरमाते रहो
तुम्हे क्या......................................

देश में बेरोजगारी हो  ,लाचारी हो
तुम अराजकता ,अशांति फैलाते रहो
खुद उसमें चर्चा कर
अपने कर्तब्य से मुख मोड़ते रहो
तुम्हे क्या फर्क ..........................

कॉलेज ,स्कूल खोलते रहो
Quality के नाम पे बेरोजगारी बढ़ाते रहो
जातिवाद पर जनता को सुलगते रहो
वोट बैलेंस के लिए दंगा करवाते रहो.
तुम्हे क्या.................................


पोलिटिक्स को गंदा बनाते रहो
अपने को सवार कर सबको समझाते रहो
भारत को incredible बता
खुद तो लूटो और लुट्वाते रहो
तुम्हे क्या.......................................


गरीब के दर्द को ताख पे रखके सुलगाते  रहो
अहिंषा,अत्याचार में खामोश ,शांत हो कर खुद को सभ्य बनाते रहो
दूसरों के देख अपने को बचाते रहो
अत्याचार के खिलाफ कुछ मत करो
बस मोर्चे के पीछे से आवाज लगते रहो
तुम्हे क्या ................. 


                              13th march 2012
                                                                    To be continue……………….

1 comment:

  1. bhai mast likha hai.............keep it continue........

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