" Copyright is reserve to the writer "

Tuesday, 13 March 2012


मेरा सपना टूट गया
    आस जिंदगी का छूट गया
कुछ करने की जो उमंग थी
    जाने क्यों मुझसे रूट गया
दुनिया क्या सोचेगी
    क्या सोचेंगे पिता भगवान
कर गया मैं उनका अपमान
    मै कुछ सोच-समझ न पाऊ
जाऊ किधर समझ न आये 
    दोनों तरफ है अंधकार मेरे जीवन में
कैसा कर गया मेरे जीवन को भगवान
    आशा इक्षा चूर हुआ
मंजिल मुझसे दूर हुआ
    अपना-पराया सब दुत्कारेंगे
दोस्तों से भी दूर हुआ
    रो-रो कर सिखा हंसना
फिर भी रोने को मजबूर हुआ
    चहुँ मैं मर जाना                                                                        
लेकिन मौत भी मुझसे दूर हुआ
     सोचा चमकुंगा तारों-सा
जमी पर ही फिसल गया
     माफ करना माँ-पिता मेरे
आपको खुशिया देने से दूर हुआ 

No comments:

Post a Comment