मेरा सपना टूट गया
आस जिंदगी का छूट गया
कुछ करने की जो उमंग थी
जाने क्यों मुझसे रूट गया
दुनिया क्या सोचेगी
क्या सोचेंगे पिता भगवान
कर गया मैं उनका अपमान
मै कुछ सोच-समझ न पाऊ
जाऊ किधर समझ न आये
दोनों तरफ है अंधकार मेरे जीवन में
कैसा कर गया मेरे जीवन को भगवान
आशा इक्षा चूर हुआ
मंजिल मुझसे दूर हुआ
अपना-पराया सब दुत्कारेंगे
दोस्तों से भी दूर हुआ
रो-रो कर सिखा हंसना
फिर भी रोने को मजबूर हुआ
चहुँ मैं मर जाना
लेकिन मौत भी मुझसे दूर हुआ
सोचा चमकुंगा तारों-सा
जमी पर ही फिसल गया
माफ करना माँ-पिता मेरे
आपको खुशिया देने से दूर हुआ
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