" Copyright is reserve to the writer "

Tuesday, 13 March 2012


शिकवा किन से करू
अपने बदकिस्मती का
गैरों ने तो खारोचा ही
दोस्तों ने वादा तोडा दोदोस्ती का

बमिश्किल से मिला था
दोस्ती का सहारा
नाव को ले जाकर मझधार में
साथ छोड़ दिया हमारा

कुछ कमी रह गई थी दोस्ती में
जो इस कदर रूठ गए हमसे
अभी तो खिले ही काटों में
फिर क्यों दर गए फूलों से

आप को साथ न देना था हमारा
तो यह राह बताया ही क्यों
मुझसे जब आपको दुश्मनी करना ही था
तो आप  मुझे देख मुस्कुराये ही क्यों

मैंने तो सब कुछ दोस्ती के दाव पर लगाया
एक आप है जो मुझे दिन-रात तड़पाया
तड़पाने से भी रास न आया तो
चलते रस्ते में भी कुआ खोद्वाया 

No comments:

Post a Comment