मैं करता हूँ आप से हमदी
आप है मेरे दिल की परी
रात हुई तो उतरे धरा पर
सुबह बन जाती बूंदों की लड़ी
सायद कहे कोई झूटी है मोहब्बत
मेरी फिर भी है रोके कई
दिल जो रोया दर्द से
दीवाना कहे मुझे हर कोई
गम के इस दर्द को
नसीब था मुझमे सम्माने को
दोस्त क्या करते मेरे सारे
जब तक़दीर में लिखा था पछताने को
हमदी हम गरीबो को नहीं मिलता
मिलती है बस तिरस्कार
दुनिया साडी मोहबत करे
मगर नहीं कर सकते प्यार
हमदी ..............................
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