23. क्या यही तेरा इंसाफ है
ऐ रोशनी के फरिस्ते
अंधकार क्यों है मेरी जिंदगी में
क्या यही तेरा इन्साफ है
जो हर कदम पे बताता इर्ष्या,द्वेष् जलन
और खुद को दिखता साफ़ है
ऐ रोशनी के ...................................
जहाँ जाऊँ मिलता तिरष्कार है
निच-द्वेष् भाव से देखता यह संसार है
किसी को मिलता मुकम्मल आसमां है
किसीको मिलता नहीं जीवन की आस है
क्या यही तेरा इंसाफ है ................
जो बोल ना पाते थे एक लफ्ज
उनकी आज यहाँ तादाद है ..
जिनके पूर्वजों ने हमें खंगाला
आज उनकी यहाँ ओउकाद है
क्या यही तेरा इंसाफ है ..........................
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