नादानी अपनी छोड़ जायेगी
बच्पन्न की झूलों को तोड़ जायेगी
जब हम अपनें में होंगे जवां
याद तेरी हमको बहुत आएगी
अपने में हमको होगी
याद तेरी जब हमको आएगी
बिछुड़ने के दिन जब याद आएगी
आँखों मेरी नम कर जायेगी
तेरे सपनों सलोनो में झांकेंगे हम
रातों को तुमको पाएंगे हम
अपनी बदकिस्मती पर रोते हुए
अक्सर तुमको मिल जायेंगे
मैं तो नाशाद हमदम रहूँगा
मिलके निराशा से लडूंगा
तेरे वगैर मैं तो जी सकूंगा
तुझको न देखकर शायद मर जाऊंगा
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