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Tuesday, 13 March 2012

नादानी अपनी छोड़ जायेगी


नादानी अपनी छोड़ जायेगी
बच्पन्न की झूलों को तोड़ जायेगी
जब हम अपनें में होंगे जवां
याद तेरी हमको बहुत आएगी

अपने में हमको होगी
याद तेरी जब हमको आएगी
बिछुड़ने के दिन जब याद आएगी
आँखों मेरी नम कर जायेगी

तेरे सपनों सलोनो में झांकेंगे हम
रातों को तुमको पाएंगे हम
अपनी बदकिस्मती पर रोते हुए
अक्सर तुमको मिल जायेंगे

मैं तो नाशाद हमदम रहूँगा
मिलके निराशा से लडूंगा
तेरे वगैर मैं तो जी सकूंगा
तुझको न देखकर शायद मर जाऊंगा
                                           


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