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Tuesday, 13 March 2012


उषा की कनक तपक है हम
देश को तपक बनायेंगे
नदियों से बढ़ना सीखेंगे
झरनों के संग गिर दिखानी है
देश है मंजिल अपनी
यही अपनी जिंदगानी है
  
अडिग पहाड़ों से टकराकर
दुनिया को यह समझाना है
आग में तपकर कनक बनती है
यह बात पुराणी है
देश है मंजिल अपनी
अपनी यही कहानी है


क्रांति किये देश में बापू
आजादी अहिंसा से लेन में
सूखे हुए मांग भी बोले
राष्ट्र को सुदृढ़ बनान है
देश है मंजिल अपनी
अपनी यही कहानी है 

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