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Tuesday, 13 March 2012

MERE कसीनो


अगर मेरे कसीनो में
आपकी याद न होती तो
न तुम होते ,न तेरी बात होती
और मैं न नाशाद होता ............

अक्सर मेरा नसीब छोड़ा है साथ
जो मेरी हो कर भी नही होती
वो एक अलग बज्म में बसा करते है
तो कैसे वो मेरे पास होती

मैं गलत सोच बैठा था
जो मेरे साथ थी ,काश ! मेरी होती
कुछ पाता या पाने का गम न होता
मेरी कासिनी काश ! मिलती तो जिंदगी जन्नत से कम न होती 

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