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Saturday, 6 October 2012

आज फिर






आज फिर चादरों में
सिमटी यादों को लपेट रहा हूँ
खामोश पलकों में
तुम्हें  महसूस कर रहा हूँ
आज फिर ................

दिल के तख्तों-ताज़ पर
तुम्हें हमेशा मेहरबान करता हूँ
बिखरे किताबों के सिरहाने
हमेशा तुम्हें पाने की कोशिश करता हूँ
आज फिर ................

बड़ी उलझन में हूँ
फिर भी आपसे हमदी करता हूँ
नाकाम नासूर दर्द को
हमेशा दूर करने की कोशिश करता हूँ
आज फिर ................

उल्फ़त ये आ पड़ी है
कसमकस में  सफ़र काट  रहा हूँ
जाने कब तुम्हारी यादें सच्चाई बन सामने आ जाएगी
इस इंतजार में उम्र काट रहा हूँ
आज फिर ................

1 comment:

  1. kya baat h bahut yaad kar rahe ho...........
    dil mein jab dard hota h to aisi hi feelings aati h

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