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Sunday, 14 October 2012

मेरी तन्हाई....



मेरी तन्हाई
रुख नमी का
सख्त कमी का
अजनबी शहर का
अंजना कहर का
मेरी तन्हाई...

मौसम तापेड़ों के
मेरे रह्बेरों में
फर्श दर्द का
द्रश्य दुरी का
तुमसे बिछुड़ने का
समां में सहमे
हवा में नमी का
साँस में तुम्ही का
class में lecture ka
जिस्म में structure का
pain में fracture का
life में future का
एहसास जंवा कर जाता है
मेरी तन्हाई.............

मेरी तन्हाई में
तुम इसकदर ,ज़िस्म के रूह में रवां हो
मनो मैं खुद में नहीं ,
तू मुझमें  फ़ना  हो....

                                               13th-oct.12

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