आज जो क़ुदरती शाम थी
तुम पास न थे बस तेरी याद थी
मैं जानता हूँ मेरी कमी तुझे परेशां करती है
तुझमे तू न थी , मुझ में भी मेरी कमी थी
हर पल तेरे साथ होने को टटोलता हूँ
मग़र ख़ुद को सिरहाने की नमी पड़ी थी
आज जो
तू दूर रह के जो यूँ मुझसे ही मुझे पाने को लड़ते हो
मैं मानता हूँ तेरा भी मुक्कमल मैं हूँ
मेरी हर शाम हर शहर तुझसे है
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