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Wednesday, 20 September 2017

इक तू ही तो है

है अज़नबी शहर
अज़नबी हवा मौसम भी ।
ज़िक्र तुम्हारी करके
कतरा कतरा करके ज़ख्मों पे नमक छिड़कते भी।
क्या कहूँ किसे कहूँ
इक तू ही तो था मेरा दर्द मेरा सुकूँ भी
खंडहर पथरीली राहबेरों में संवारना
इक तू ही तो था दोस्त भी ज़ुनू भी
तेरी गुमशुदगी मुझे रुलाती है
छुपा नही पता दर्द और तेरी रुसवाई भी

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