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Saturday, 23 September 2017

ऐसा अब लगता है
भीड़ भी पुराना हो गया
जो कल तक सबसे क़रीब थे
अब वो अनजाना हो गया
बगैर उनके जो ढ़लती न थी शाम अपनी
वो ऐसे बेगाना हो गया

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