This is my personal experience, feelings and thought
ऐसा अब लगता है भीड़ भी पुराना हो गया जो कल तक सबसे क़रीब थे अब वो अनजाना हो गया बगैर उनके जो ढ़लती न थी शाम अपनी वो ऐसे बेगाना हो गया
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