This is my personal experience, feelings and thought
इल्तज़ा बस इतनी सी है इंतज़ार नहीं कर सकता आंखों में यूँ उमड़ा है प्यार इज़हार नहीं कर सकता दुआ है ख़ुदा से बस इतनी दूरी दे पर जुदाई बर्दाश्त नही कर सकता
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