ये कैसा है संसार
इंसान करता नहीं इंसानियत से प्यार
सच और नेक का छोड़ो
झूठ और फ़रेब का करता हर कोई व्यापार
ये कैसा.........
हर कोई लगा है यहाँ
कैसे काटके बनु मैं मालदार
सब जानते है कुछ न जायेगा साथ
फिर भी डूबी पड़ी है सबके विचार
ये कैसा .........
सम्भल जाओ ये संसार
यहाँ आये हो बढ़ाने प्यार और विचार
मत करो किसी पे अत्याचार
हर तरफ बांटों ख़ुशी और व्यवहार
इसी में है हर धर्म का विस्तार
-Binodanderson
M.nagar(22:42)
18/01/17
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