चलो अब
जो बीत गई सो बात गई
अब नये साल से
नई शुरुआत करते है
हम अपनी ज़िंदगी को
नई पँख नये आयाम देते है
चलो अब.....
जो हो गई थी बैर
उनको भी अब समाप्त करते है
नये जोश और उल्लास से
हम अब नई सुरुआत करते है
चलो अब .......
हर लबों पे ख़ुशी लाकर
ख़ुद की भी ख़ुशी महसूस करते है
अपनी ज़िंदगी तो हर कोई जीता है यहाँ
एक बार उन बेसहारा,मज़बूर के लिए जीते है
चलो अब ........
ऊंच,नीच,जात पात छोड़ के
मानवता का हाथ पकड़ते है
बुझ गए है जिनके दीये
उनके घरों में भी रौशनी की बरसात करते है
चलो अब ..........
ये सब युवा ही कर सकता है
आओ सब मिलके एक दुज़े का हाथ पकड़ते है
गुज़र गया हो दिन तो क्या
इस नये साल से शुरुआत करते है
चलो अब .........
-Binodanderson
M.nagar (29/12/16)
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