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Thursday, 29 November 2012

कमी महसूस करता हूँ



               
अब दबे पांव,
तुम्हारी कमी महसूस करता हूँ
तेरे होठों में छिपी ख़ामोशी का 
जबाब महसूस  करता हूँ
जो पहले मुकरर था चेहरा 
उसकी रौनक रौशनी की 
कमी महसूस करता हूँ
आगोश में ज़न्नत का ख्वाब था 
अब तेरे यादों के सायों में लिपटा या 
तेरे बहायें पसारे लिपटने की कमी 
महसूस करता हूँ
यादों के प्रकाश को रंज कर 
बांहों में सुलाना 
तेरे ऊष्मा में लिप्त प्यार का 
कमी महसूस करता हूँ 
हर जगह हर वक्त तेरा साथ था 
अब शायद ही हो ,
तेरे न होने की कमी महसूस करता हूँ
                                                          24th nov.12


सुलगते  हुए इश्क के आंच से 
मेरे जिस्म में तेरे साँस की 
हर सुबह तेरे मीठी-सी बात की 
हर शाम के ज़ज्बात की 
कमी महसूस करता हूँ
मेरे खुद में ,की कमी सी 
तेरे ना होने से नमी -सी  
तेरे पास होने से ,
एक जीवंत जोश भरी ख़ुशी 
की कमी महसूस करता हूँ 
तेरे चले जाने के बाद की बेचैनी 
तेरे आने से पहले का इंतजार का 
तेरा खाना में पुचकारने का 
गलती में डांटने का 
दूर होने पे पास एहसास करने की 
कमी महसूस करता हूँ 
अब दबे पांव ,नम आँखों से 
हर वक्त तेरी कमी  महसूस करता हूँ 

                                                    25th-nov-12

दिल्ली की सड़कों पे ,गलियों में 
बिछड़े तेरे यादों की खुशबु 
पटना के सड़कों पे खुद को तनहा 
महसूस करता हूँ 
वो लाजपत नगर का  shoping
वो S.N Market ka craze 
वो C.P का Pallika Bazzar 
वो India gate की रात 
वो हल्दीराम में साथ 
वो हर special बात की 
कमी महसूस करता हूँ 
                 to be conti......
                                                        26th-nov-12

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