गिले तख़्त पे ,सुखी नज़र है
बियर की बोतल में गम का शहर है
कौन कहता है की मेरी ज़ेहन में तेरा नाम है
दिल में दर्द है ,और मेरी आवाज़ है
गिले तख़्त पे .......
जंहा में फैला अँधेरे का प्रकाश है
जिंदगी झुलसी हुई और गम ही प्यास है
दिल के दलदल में फस रहा आज का समाज है
कौन कहता है की युवा का राज़ है
दिल में दर्द है ,और मेरी आवाज़ है
गिले तख़्त पे .......
चोट और परिवार का प्रहार है
आदमी सुखा और गिला समाज है
काग़ज की कसती पे छपा इश्तिहार है
मौत निश्चित है फिर जिंदगी से प्यार है
दिल में दर्द है ,और मेरी आवाज़ है
गिले तख़्त पे .......
3rd sep
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