मेरे रगों में तेरा बसर है
मुझमें मैं नहीं ,तेरा शहर है
तेरा ये जो प्यार का इल्म है
कैसे बताऊँ ढाह रहा जो कहर है
मेरे रगों तेरा बसर
है...................
हरवक्त मुझमें तेरे
यांदों का रह्बहर है
शिकश्त दे जाती है ये,जो तेरा मुझमें घर है
इतने पास हो आप मेरे
फिर भी आपके यादों
में ठहर
है
मेरे रगों में तेरा
बसर है ................
इनायत मुझपे बस करदो इतना
जुदाई का ना कभी मुझमें शहर हो
मर्ज हर चीज की शिनाख्त हो जाती
है इस जंहा में
टूटे दिल का ना कोई घर है
मेरे रगों में तेरा बसर है
.........................
वक्त के सायों में प्यार बदला है
तुम ना बदलना यह
तुझसे महर है
गमगीन जिंदगी जी न पाउँगा
बस यही एक मुझे दर
है
मेरे रगों में तेरा
बसर है .......................
महर =विनती
शहर =सुबह
17th april2012
3:46pm
its very nice yaar...
ReplyDelete- Adyasha
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